मुंबई वार्ता संवाददाता

सुप्रिया सुले ने केंद्र सरकार पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि 2023 में संसद से सर्वसम्मति से पारित महिला आरक्षण विधेयक अभी तक लागू क्यों नहीं किया गया। उन्होंने पूछा कि करीब ढाई से तीन साल बीत जाने के बाद भी महिलाओं को 33% आरक्षण क्यों नहीं मिला।


सुळे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह विधेयक 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू होना चाहिए था। उन्होंने मांग की कि 543 सीटों में तुरंत 33% आरक्षण महिलाओं को दिया जाए, क्योंकि इसके लिए जरूरी संवैधानिक संशोधन पहले ही हो चुका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक वास्तव में महिला आरक्षण से ज्यादा डिलिमिटेशन (सीटों के पुनर्निर्धारण) से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार, सरकार अंमलबजावणी में जानबूझकर देरी कर रही है, जिससे महिला आरक्षण का मुद्दा लटकता जा रहा है।
सुळे ने कहा कि विधेयक में स्पष्ट रूप से जनगणना और डिलिमिटेशन को लागू करने की शर्त रखी गई है। उन्होंने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने जातीय जनगणना के लिए न तो पर्याप्त बजट दिया और न ही समय पर प्रक्रिया शुरू की, जिससे पूरा मामला अटक गया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि उनसे ज्यादा अपेक्षा थी, लेकिन वे भी पार्टी लाइन के अनुसार ही बयान दे रहे हैं।
सुळे ने यह भी सवाल उठाया कि संसद का हालिया विशेष सत्र बुलाने का क्या फायदा हुआ, जब कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। उन्होंने इसे जनता के पैसों की बर्बादी बताया।
अंत में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पूरी तरह समर्थन में है और इस मुद्दे पर खुली बहस के लिए भी तैयार है।


