मुंबई वार्ता संवाददाता

अस्पतालों में मरीजों के साथ हो रही बदसलूकी, इलाज में लापरवाही और इलाज के नाम पर आर्थिक शोषण अब आम बात होती जा रही है। ऐसी ही एक बेहद चौंकाने वाली और संवेदनहीन घटना मुंबई के प्रतिष्ठित और धर्मादाय रूप से पंजीकृत मसिना अस्पताल में सामने आई है। यहां एक महिला पत्रकार के पिता के निधन के बाद, बकाया बिल का हवाला देकर अस्पताल प्रशासन ने करीब आठ घंटे तक मृतक का शव परिजनों को सौंपने से इनकार कर दिया। इस घटना के सामने आते ही पूरे स्वास्थ्य क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है।


अस्पताल प्रशासन की असंवेदनशीलता उजागरमसिना अस्पताल में हुई यह घटना दर्शाती है कि किस तरह मुनाफाखोरी के चक्कर में कुछ अस्पताल मानवीय संवेदनाएं खोते जा रहे हैं।
महिला पत्रकार के पिता महेश भालेराव को 8 जनवरी को इस धर्मादाय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान 10 जनवरी की तड़के करीब 3.30 बजे उनका निधन हो गया। पिता के निधन से शोकग्रस्त परिवार ने जब शव सौंपने की मांग की, तो अस्पताल प्रशासन ने कथित तौर पर बकाया राशि का हवाला देते हुए शव देने से मना कर दिया।


पीड़ित परिवार का आरोप है कि अस्पताल के नियमों का बहाना बनाकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। इतना ही नहीं, अस्पताल की ट्रस्टी कविता पाई से मिलने का प्रयास भी विफल रहा। इससे पहले 9 जनवरी को शल्यक्रिया के लिए तात्कालिक रूप से तीन लाख रुपये जमा करने का दबाव भी परिवार पर डाला गया था।
■ स्वास्थ्य मंत्री ने दिए जांच के आदेश
पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में हुई लापरवाही की घटना अभी ताजी ही है, और इसी बीच मुंबई की इस घटना ने एक बार फिर धर्मादाय अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
संबंधित महिला पत्रकार ने मुख्यमंत्री कार्यालय और धर्मादाय आयुक्त के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई है।मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने इस पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्री के आदेश के बाद मसिना अस्पताल प्रशासन की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।


