मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) आयुक्त अश्विनी भिडे ने निर्देश दिए हैं कि मुंबई में निर्माणाधीन सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे कर तत्काल चालू किए जाएं। उन्होंने शनिवार को मालाड स्थित निर्माणाधीन एसटीपी परियोजना का निरीक्षण किया और वहां चल रहे कार्यों की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।


मुंबई में समुद्र में जाने वाले पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए बीएमसी की ओर से वरली, धारावी, बांद्रा, घाटकोपर, भांडुप, वेसावे (वर्सोवा) और मालाड में सात नए एसटीपी बनाए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं की कुल क्षमता 2,464 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) है। इसके अलावा कुलाबा में 37 एमएलडी क्षमता का एसटीपी अप्रैल 2020 से संचालित है। इस तरह शहर की कुल सीवेज शोधन क्षमता 2,501 एमएलडी होगी।


निरीक्षण के दौरान आयुक्त अश्विनी भिडे ने परियोजना के सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मशीनरी की स्थापना, विद्युत व्यवस्था, प्रक्रिया इकाइयों की कार्यक्षमता और सुरक्षा उपायों का जायजा लिया तथा अधिकारियों और ठेकेदारों को गुणवत्ता से कोई समझौता किए बिना समय पर परियोजना पूरी करने के निर्देश दिए।
बैठक में अतिरिक्त नगर आयुक्त (परियोजना) अभिजीत बांगर, स्थानीय नगरसेविका कमरजहां सिद्दीकी तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
आयुक्त ने बताया कि 454 एमएलडी क्षमता वाला मालाड एसटीपी जुलाई 2022 से निर्माणाधीन है। इस परियोजना का निर्माण कार्य छह वर्षों में पूरा किया जाना है, जबकि इसके संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी अगले 15 वर्षों तक रहेगी। इसमें सीक्वेंशियल बैच रिएक्टर (SBR) तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इस संयंत्र में प्रतिदिन 454 एमएलडी सीवेज का द्वितीयक उपचार किया जाएगा, जबकि 227 एमएलडी पानी का तृतीयक उपचार भी किया जाएगा। परियोजना में भूमि सुधार, आधुनिक सीवेज शोधन संयंत्र, उच्च गुणवत्ता की स्लज प्रोसेसिंग और उपचार प्रक्रिया से बनने वाली बायोगैस से बिजली उत्पादन जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।
अश्विनी भिडे ने कहा कि परियोजना के लिए मैंग्रोव क्षेत्र से संबंधित आवश्यक अनुमति प्राप्त हो चुकी है। नया एसटीपी शुरू होने के बाद समुद्री जल की गुणवत्ता में सुधार होगा, समुद्री जैव विविधता को लाभ मिलेगा और दहिसर, बोरिवली, कांदिवली, मालाड तथा गोरेगांव क्षेत्र के लाखों नागरिकों को स्वच्छ पर्यावरण का लाभ मिलेगा।


