श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मुंबई के सरकारी अस्पतालों के ब्लड बैंकों में रक्त की कमी से मरीजों और उनके परिजनों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर थैलेसीमिया और सिकल सेल जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों के इलाज पर इसका असर पड़ रहा है। कई ब्लड ग्रुप उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों के परिजनों को निजी ब्लड बैंकों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ गया है।


शहर के कई सरकारी अस्पतालों में हाल के दिनों में ब्लड स्टॉक काफी कम हो गया है। यहां तक कि सबसे अधिक मांग वाले ‘ए’ ब्लड ग्रुप की भी कई अस्पतालों में कमी बताई जा रही है।


प्रमुख अस्पतालों में मौजूदा ब्लड स्टॉक
केईएम अस्पताल : 65 यूनिट (दैनिक आवश्यकता 100 से 129 यूनिट)
सेंट जॉर्ज अस्पताल : 4 यूनिट (दैनिक आवश्यकता 10 से 15 यूनिट)
राजावाड़ी अस्पताल : 46 यूनिट
इंडियन रेड क्रॉस : 3 यूनिट
जेजे अस्पताल ब्लड बैंक : 44 यूनिट
जीटी अस्पताल : 20 यूनिट
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल, कांदिवली शताब्दी : 13 यूनिट
कामा अस्पताल : 21 यूनिट
बांद्रा भाभा अस्पताल : 16 यूनिट
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यह स्टॉक रोजाना की जरूरत और नियमित रक्त चढ़ाने वाले मरीजों के लिए पर्याप्त नहीं है। थैलेसीमिया और सिकल सेल रोगियों को हर 15 से 20 दिन में रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि यह कमी जारी रही तो इमरजेंसी सेवाओं और नियमित इलाज पर गंभीर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक अप्रैल और मई में परीक्षा तथा गर्मी की छुट्टियों के कारण रक्तदान शिविरों की संख्या घट जाती है। बड़ी संख्या में लोग अपने गृह नगर चले जाते हैं, जिससे हर साल इस अवधि में रक्तदान कम हो जाता है।
हालांकि राज्य रक्त संक्रमण परिषद ने किसी वास्तविक कमी से इनकार किया है। परिषद के अनुसार महाराष्ट्र में कुल 35,942 यूनिट रक्त उपलब्ध है, जबकि मुंबई के ब्लड बैंकों में 5,110 यूनिट रक्त मौजूद है, जिसे मांग के मुकाबले पर्याप्त बताया गया है।
अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।


