मुंबई वार्ता संवाददाता

आगामी मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी ने अपने सभी प्रमुख नेताओं को चुनाव मैदान में उतारते हुए व्यापक रणनीति बनाई है। मुंबई भाजपा की चुनावी तैयारी और शहर के भविष्य के विकास को लेकर भाजपा विधान परिषद सदस्य एवं बीएमसी में आठ वर्षों तक विपक्ष के नेता रहे राजहंस सिंह ने अपने ज्वलंत विचार साझा किए।


74 हजार करोड़ के बजट के बावजूद विकास क्यों नहीं हुआ? इस सवाल का जवाब देते हुए विधायक राजहंस सिंह ने कहा कि मुंबई महानगरपालिका का वार्षिक बजट करीब 74 हजार करोड़ रुपए का है, लेकिन इसके अनुरूप शहर का विकास नहीं हो पाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि बीते 25 वर्षों तक शिवसेना (अविभाजित) के शासनकाल में लगभग 3 लाख करोड़ रुपए का भ्रष्टाचार हुआ।उनके अनुसार, मनपा अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से कमीशनखोरी के कारण मुंबई का विकास बाधित रहा।
उन्होंने कहा कि महायुति की सत्ता आने पर इन सभी कथित घोटालों की जांच कराई जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व की राज्य सरकारों ने मुंबई पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया, जबकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में राज्य सरकार बनने के बाद मुंबई के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।


■ मुंबई की सबसे बड़ी जरूरत: जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार
मुंबई की प्राथमिक जरूरतों पर बोलते हुए राजहंस सिंह ने कहा किशहर में गटर लाइनों के पास से गुजरने वाली जर्जर जलापूर्ति पाइपलाइनों को तत्काल बदला जाना चाहिए।उन्होंने चेतावनी दी कि पानी का दबाव कम होने पर गटर का पानी पाइपलाइनों में मिल सकता है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो सकता है।
उन्होंने बताया कि मुंबई में इस समय 700 एमएलडी पानी की कमी है, जिसका प्रमुख कारण पानी की चोरी और पाइपलाइनों का क्षतिग्रस्त होना है। इस समस्या के समाधान के लिए गारगाई सहित नए जलस्रोतों की खोज आवश्यक है।
79 हजार करोड़ की एफडी पर सवालिया निशान लगाते हुए राजहंस सिंह ने कहा कि, “मुंबई महानगरपालिका ने बैंकों में करीब 79 हजार करोड़ रुपए की एफडी जमा कर रखी है, जबकि शहरवासी पानी, सड़कों, कचरा प्रबंधन, फुटपाथ और सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, तो इतनी बड़ी एफडी का क्या औचित्य है? उनके अनुसार, इस राशि का उपयोग सीधे मुंबई के विकास कार्यों में किया जाना चाहिए।
महापौर पद को लेकर चल रहे विवाद पर राजहंस सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस स्पष्ट कर चुके हैं कि मुंबई का महापौर हिंदू और मराठी भाषी होगा। मुंबई और महाराष्ट्र पर पहला अधिकार मराठी भाषियों का है और इस विषय में अब कोई भ्रम नहीं रहना चाहिए।


