मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई–पुणे द्रुतगति महामार्ग पर खोपोली से कुसगांव के बीच 19.80 किलोमीटर लंबी नई ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना के काम में भारी देरी हुई है। वर्ष 2019 में शुरू हुई यह परियोजना अब तक पूरी हो जानी चाहिए थी, लेकिन तकनीकी और भौगोलिक चुनौतियों के कारण इसमें विलंब हुआ है। इस देरी का सीधा असर परियोजना की लागत पर पड़ा है, जो लगभग 10 प्रतिशत बढ़ गई है।


महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (एमएसआरडीसी) के अनुसार, पहले इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 6,850 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर लगभग 7,500 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है। एमएसआरडीसी ने लागत बढ़ने की पुष्टि करते हुए कहा है कि परियोजना अब मार्च तक पूरी होने की उम्मीद है, जिसके बाद वास्तविक खर्च की स्थिति स्पष्ट होगी।


मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे के कारण दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय करीब ढाई घंटे तक सिमट गया है, लेकिन लगातार बढ़ती वाहन संख्या के चलते यह मार्ग अब क्षमता से अधिक दबाव झेल रहा है। खासतौर पर व्यस्त समय में भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है। भविष्य में वाहनों की संख्या और बढ़ने की आशंका को देखते हुए एमएसआरडीसी ने ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना को शुरू किया है, जिससे यात्रा अधिक सुगम और सुरक्षित हो सके।यह परियोजना तकनीकी दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण है। इसमें पहाड़ों और झीलों के नीचे सुरंगों का निर्माण, गहरी घाटियों के ऊपर केबल-स्टे ब्रिज बनाना जैसे जटिल कार्य शामिल हैं।
इसके अलावा ऊंचाई पर काम करते समय तेज धूप, हवा और भारी बारिश जैसी प्राकृतिक परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ता है। इन्हीं कारणों से परियोजना के पूरा होने में देरी हुई है, ऐसा एमएसआरडीसी के अधिकारियों ने बताया।परियोजना पूरी होने के बाद मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक का दबाव कम होने और यात्रियों को अधिक तेज, सुरक्षित और आरामदायक सफर मिलने की उम्मीद है।


