मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई महानगरपालिका की 15 जनवरी को होने वाली चुनावी प्रक्रिया के लिए प्रशासन ने करीब 75 हजार कर्मचारियों की नियुक्ति के आदेश जारी किए हैं और उन्हें चुनाव संबंधी प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। लेकिन इसी बीच प्रशासन की एक गंभीर लापरवाही सामने आई है। चुनाव ड्यूटी के लिए एक मृत कर्मचारी के नाम पर नियुक्ति आदेश जारी कर उसे प्रशिक्षण में उपस्थित रहने के निर्देश दे दिए गए।इस मामले की जानकारी मिलते ही संबंधित विभाग के कर्मचारी भी हैरान रह गए।


मुंबई महानगरपालिका की चुनाव प्रक्रिया 15 जनवरी को होगी, जबकि मतगणना 16 जनवरी को की जाएगी।महानगरपालिका प्रशासन ने चुनाव के सामान्य कार्यों के लिए 15 हजार, जबकि प्रत्यक्ष मतदान और मतगणना के लिए 60 हजार अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति की है। कुल मिलाकर 75 हजार अधिकारी-कर्मचारी चुनावी कार्य में तैनात रहेंगे।मतदान और मतगणना के दिन किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए प्रशासन ने कर्मचारियों को दो चरणों में प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है।
पहला चरण 29 दिसंबर से 2 जनवरी, जबकि दूसरा चरण 5 से 8 जनवरी के बीच आयोजित किया गया है।मुंबई महानगरपालिका चुनाव के लिए कुल 10,231 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। लगभग 64,375 अधिकारी और कर्मचारियों को सात प्रशिक्षण केंद्रों पर तीन सत्रों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण सत्रों का समय सुबह 9 से 11, दोपहर 12 से 2 और दोपहर 3 से शाम 5 बजे तक रखा गया है। प्रत्येक केंद्र पर 5 प्रशिक्षकों की व्यवस्था की गई है, इस प्रकार कुल 35 प्रशिक्षक नियुक्त किए गए हैं। पहले चरण का प्रशिक्षण 29 दिसंबर से 2 जनवरी के बीच संपन्न हुआ।
मुंबई महानगरपालिका सार्वत्रिक चुनाव नियमावली 2006 के नियम 32 तथा राज्य निर्वाचन आयोग के आदेश के अनुसार, मुंबई महानगरपालिका आयुक्त भूषण गगराणी के हस्ताक्षर से दिसंबर महीने में चुनावी कार्यों के लिए कर्मचारियों के नियुक्ति आदेश जारी किए गए थे।इसी क्रम में महानगरपालिका के एस प्रशासनिक विभाग अंतर्गत सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत स्वच्छता निरीक्षक महेश अनंत जवेरी के नाम पर 22 दिसंबर 2025 को चुनाव ड्यूटी का नियुक्ति आदेश जारी किया गया।
आदेश में उन्हें एल प्रशासनिक विभाग कार्यालय में चुनावी कार्य के लिए नियुक्त किए जाने का उल्लेख है, जबकि संबंधित कर्मचारी का पहले ही निधन हो चुका है।इस घटना ने मुंबई महानगरपालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं और चुनावी तैयारियों में बरती जा रही गंभीर लापरवाही को उजागर किया है।


