मुंबई वार्ता संवाददाता

विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर द्वारा पद का दुरुपयोग कर किया गया व्यवहार आदर्श आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है। इस घटना के सीसीटीवी फुटेज को नष्ट किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं है। चुनाव आयोग को जनता की नहीं तो कम से कम अपनी अंतरात्मा की सुनते हुए अब तक मामला दर्ज कर लेना चाहिए था, लेकिन आयोग भाजपा के दबाव में काम कर रहा है, यह एक बार फिर सामने आया है, ऐसा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।


इस संबंध में बोलते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष, विधान परिषद के सभापति, लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा के सभापति और राज्यपाल जैसे पदों पर बैठे व्यक्तियों को अराजनीतिक भूमिका निभानी होती है। ये अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक पद हैं। लेकिन राहुल नार्वेकर ने गुंडों और मवालियों जैसा व्यवहार किया, विपक्षी दल के एक व्यक्ति को धमकाया। उनकी देहभाषा, आचरण और धमकाने का तरीका बेहद निम्न स्तर का था। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। अपने परिवार के व्यक्ति को निर्विरोध चुने जाने के लिए उन्होंने चुनाव निर्णय अधिकारी का रास्ता रोककर रखा, विपक्ष को नामांकन दाखिल करने से रोका। यह उनका अशोभनीय व्यवहार है और उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया है।
हरिभाऊ राठोड एक पूर्व सांसद हैं। उन्हें धमकाना और उनकी सुरक्षा हटाने के निर्देश देना किस प्रकार का आचरण है? विधानसभा अध्यक्ष के रूप में वे आदेश देते हैं और नार्वेकर खुद को संविधान से ऊपर समझने लगे हैं। चुनाव जीतने के बाद होने वाले घोड़े-बाज़ार को तो हमने देखा है, लेकिन अब चुनाव से पहले ही ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ जैसा हाल शुरू हो गया है। जो निर्विरोध चुने गए हैं, वे इसलिए नहीं कि वे लोकप्रिय हैं। चुनाव का मतलब लोकतंत्र और मतदान होता है, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया को ही कमजोर किया जा रहा है, जिसके देश को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे, ऐसा सपकाल ने कहा।
उपमुख्यमंत्री अजित पवार पर 70 हजार करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के आरोपों के सवाल पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि सत्ता में बैठे लोग भ्रष्ट हैं, इसलिए कोई किसी पर कार्रवाई नहीं कर सकता और न ही सत्ता से बाहर जाता है। लेकिन अजित पवार ने नरेंद्र मोदी और देवेंद्र फडणवीस को ही खुली चुनौती दी है, ऐसा भी सपकाल ने कहा।
केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कुख्यात गुंड निलेश घायवल को पासपोर्ट दिलाने में मदद की, ऐसा खुलासा उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने किया है। यह अत्यंत गंभीर मामला है और पासपोर्ट अधिनियम, 1967 का उल्लंघन है। कुख्यात गुंडों को विदेश जाने में मदद करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने जैसा है। इसलिए मुरलीधर मोहोल से तुरंत इस्तीफा लिया जाना चाहिए और इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जानी चाहिए।


