■ आरटीआई से बीएमसी की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल; 2,14,917 शिकायतों में से 1,16,228 डुप्लीकेट घोषित।
■ वास्तविक शिकायतें 98,689; 29,916 मामलों में ध्वस्तीकरण जरूरी, लेकिन कार्रवाई पूरी सिर्फ 13,211 मामलों में।
श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मुंबई को शंघाई बनाने का सपना महाराष्ट्र सरकार देख रही है, लेकिन दूसरी ओर मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के कामकाज की हकीकत इस सपने पर सवाल खड़े कर रही है। शहर में अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शुरू की गई महानगरपालिका की ऑनलाइन शिकायत प्रणाली भी अपेक्षित परिणाम देती नजर नहीं आ रही है।


सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत सामने आए आंकड़ों के अनुसार, पिछले करीब 10 वर्षों में अवैध निर्माणों के संबंध में 2 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं, लेकिन ध्वस्तीकरण की वास्तविक कार्रवाई कुल शिकायतों के मुकाबले महज 6.15 प्रतिशत मामलों में ही पूरी हो सकी है।मुंबई में अवैध निर्माणों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। ऐसे निर्माणों पर रोक लगाने और उन्हें ध्वस्त करने के लिए महानगरपालिका हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है। इसके बावजूद कार्रवाई के आंकड़े प्रशासन की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।


कमला मिल कंपाउंड, भानु फरसाण मार्ट, होटल सिटी किनारा, हुसैनी बिल्डिंग (भिंडी बाजार) और साई सिद्धि बिल्डिंग (घाटकोपर) जैसी दुर्घटनाओं में कई लोगों की जान जा चुकी है। इन घटनाओं के मद्देनजर अवैध निर्माणों के खिलाफ समय रहते कार्रवाई करना बेहद जरूरी है।नागरिकों को अवैध निर्माणों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की सुविधा देने के लिए बीएमसी ने 1 मार्च 2016 को ऑनलाइन आरईटीएमएस (RETMS) शिकायत प्रणाली शुरू की थी। आरटीआई कार्यकर्ता शकील अहमद शेख ने महानगरपालिका के अतिक्रमण एवं निष्कासन विभाग, पूर्व उपनगर से इस प्रणाली के तहत दर्ज शिकायतों, जारी नोटिसों और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के संबंध में जानकारी मांगी थी। इस पर जनसूचना अधिकारी तथा सहायक अभियंता (अतिक्रमण एवं निष्कासन), पूर्व उपनगर की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
■ 2.14 लाख शिकायतों में से 1.16 लाख डुप्लीकेट।
महानगरपालिका की ओर से 26 अक्टूबर 2026 को तैयार की गई ‘वार्डवाइज डिटेल्स समरी काउंट रिपोर्ट’ के अनुसार, 1 मार्च 2016 से 26 अक्टूबर 2026 तक RETMS प्रणाली पर कुल 2,14,917 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से 1,16,228 शिकायतों को डुप्लीकेट घोषित किया गया। इस प्रकार रिपोर्ट के मुताबिक वास्तविक शिकायतों की संख्या 98,689 रह जाती है।हालांकि, कुल दर्ज शिकायतों की तुलना में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई केवल 13,211 मामलों में पूरी की गई। यह कुल शिकायतों का लगभग 6.15 प्रतिशत है।
रिपोर्ट में 29,916 मामलों में ध्वस्तीकरण आवश्यक बताया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की रफ्तार को लेकर गंभीर सवाल मौजूद हैं।
■ नोटिस जारी करने से लेकर ध्वस्तीकरण तक के आंकड़े
महानगरपालिका की रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े इस प्रकार हैं:|
कुल दर्ज शिकायतें | 2,14,917 ||
डुप्लीकेट घोषित शिकायतें | 1,16,228 ||
वास्तविक शिकायतें | 98,689 ||
तैयार किए गए नोटिस | 60,332 ||
जारी किए गए नोटिस | 57,521 ||
कारण बताओ आदेश जारी | 31,486 ||
ध्वस्तीकरण आवश्यक वाले मामले | 29,916 ||
ध्वस्तीकरण की व्यवस्था करना बाकी | 15,318 ||
ध्वस्तीकरण की व्यवस्था की गई | 1,387 || ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी | 13,211 ||
ध्वस्तीकरण के बाद बंद नोटिस | 3,428 ||
बंद की गई शिकायतें | 38,098 ||
बंद होने की प्रतीक्षा में शिकायतें | 13,734 |
रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कुल शिकायतों में से आधे से अधिक को डुप्लीकेट घोषित किया गया है। किन मानदंडों के आधार पर इन शिकायतों को डुप्लीकेट माना गया, उनकी जांच किस तरह की गई और संबंधित शिकायतकर्ताओं को इसकी जानकारी दी गई या नहीं, यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है।इसी तरह, 29,916 मामलों में ध्वस्तीकरण आवश्यक होने के बावजूद केवल 13,211 मामलों में कार्रवाई पूरी हुई है। शेष मामलों की वर्तमान स्थिति और उन पर अब तक की गई कार्रवाई का विवरण भी प्रशासन को सार्वजनिक करना चाहिए।
■ एल विभाग में सबसे ज्यादा शिकायतें, लेकिन कार्रवाई बेहद कम
रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख पांच प्रशासनिक विभागों में शिकायतों और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का विवरण इस प्रकार है:* एल विभाग: 30,935 शिकायतें, जबकि केवल 637 मामलों में ध्वस्तीकरण।
* के/पूर्व विभाग: 24,064 शिकायतें, जबकि 1,325 मामलों में ध्वस्तीकरण।
* एम/पूर्व विभाग: 14,510 शिकायतें, जबकि केवल 159 मामलों में ध्वस्तीकरण।
* पी/दक्षिण विभाग: 14,424 शिकायतें, जबकि 1,932 मामलों में ध्वस्तीकरण।
* के/पश्चिम विभाग: 11,433 शिकायतें, जबकि 1,683 मामलों में ध्वस्तीकरण।
इन आंकड़ों के अनुसार एल विभाग में सबसे अधिक शिकायतें दर्ज की गईं, लेकिन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का आंकड़ा तुलनात्मक रूप से काफी कम है। वहीं, एम/पूर्व विभाग में 14,510 शिकायतों के मुकाबले केवल 159 मामलों में ध्वस्तीकरण होना विशेष रूप से चिंताजनक है।
■ सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद ही सक्रिय होता है प्रशासन?
बोरीवली पूर्व में बेस्ट बस डिपो के लिए आरक्षित भूखंड पर अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों को हटाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई महानगरपालिका के कामकाज पर कड़ी नाराजगी जताई थी। न्यायालय के आदेशों का समय पर पालन नहीं किए जाने के कारण महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिडे के वेतन को लेकर भी सख्त निर्देश दिए गए थे। इसके बाद प्रशासन ने संबंधित अवैध निर्माणों के खिलाफ तत्काल तोड़क कार्रवाई की।इस घटनाक्रम के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या महानगरपालिका प्रशासन केवल न्यायालय की फटकार के बाद ही सक्रिय होता है? शहर के दूसरे इलाकों में हजारों अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी? न्यायालय के आदेश का इंतजार किए बिना प्रशासन स्वयं कार्रवाई क्यों नहीं करता?
■ हर साल 50 करोड़ रुपये खर्च, फिर भी कार्रवाई पर सवाल
आरटीआई कार्यकर्ता शकील अहमद शेख के अनुसार, बीएमसी के बिल्डिंग एंड फैक्ट्री विभाग की ओर से अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई, पुलिस बंदोबस्त और अन्य प्रशासनिक संसाधनों पर हर साल करीब 50 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का दावा है। उन्होंने यह भी कहा कि हर साल 15 हजार से अधिक नोटिस जारी किए जाते हैं।इसके बावजूद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का अनुपात बेहद कम होने से इस खर्च और उसके परिणामों का हिसाब सार्वजनिक करने की जरूरत है।
शेख ने कुछ स्थानों पर केवल कागजी अथवा दिखावटी कार्रवाई किए जाने का आरोप भी लगाया है।उन्होंने सवाल उठाया है कि नोटिस जारी होने के बाद वास्तविक ध्वस्तीकरण क्यों नहीं किया जाता? कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ क्या अनुशासनात्मक कदम उठाए गए हैं? अवैध निर्माणों को संरक्षण देने के आरोपों में जिम्मेदार अधिकारियों को अब तक कितनी बार निलंबित किया गया है?
■ आयुक्त अश्विनी भिडे और प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग
शकील अहमद शेख ने मांग की है कि महानगरपालिका की नाकामी का ठीकरा आरटीआई कार्यकर्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर फोड़ने के बजाय अवैध निर्माणों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।उनका कहना है कि जब बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज हुई हैं, हजारों नोटिस जारी किए गए हैं और ध्वस्तीकरण के लिए इतने मामले लंबित हैं, तो संबंधित विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय करना जरूरी है। नोटिस जारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों को निलंबित करने सहित उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।इस संबंध में शेख ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मुंबई महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिडे को पत्र भेजकर लंबित अवैध निर्माणों के खिलाफ जल्द से जल्द ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने तथा दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
आरटीआई से सामने आए ये आंकड़े मुंबई में अवैध निर्माणों के खिलाफ महानगरपालिका की कार्रवाई की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। 2.14 लाख से अधिक शिकायतें, 1.16 लाख डुप्लीकेट प्रविष्टियां, हजारों नोटिस और ध्वस्तीकरण की प्रतीक्षा में बड़ी संख्या में मामले प्रशासनिक जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
अब देखना यह है कि महानगरपालिका प्रशासन इन शिकायतों पर ठोस कार्रवाई करता है या मुंबई को सुरक्षित और नियोजित शहर बनाने का सपना केवल घोषणाओं तक ही सीमित रह जाता है।


