श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

Bombay High Court ने शहर में लगातार बढ़ते अवैध फेरीवालों के मुद्दे पर मंगलवार को कड़ा रुख अपनाया और बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) तथा मुंबई पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
जस्टिस अजय गडकरी और कमल खाटा की खंडपीठ ने कहा, “बीएमसी कहती है यह पुलिस की जिम्मेदारी है और पुलिस कहती है यह बीएमसी की जिम्मेदारी है, तो आम आदमी कहां जाए?” अदालत ने अधिकारियों के ढीले रवैये पर नाराजगी जताई।


■ ऑन-ग्राउंड निरीक्षण का आदेश
अदालत ने पहले दिए गए आदेशों के पालन की जांच के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से फ्लोरा फाउन्टन तके प्रमुख इलाकों का तत्काल निरीक्षण कराने का निर्देश दिया।
एमिकस क्यूरी जमशेद मिस्त्री और अधिवक्ता चैतन्य चव्हाण को पुलिस सुरक्षा के साथ निरीक्षण का जिम्मा सौंपा गया।
■ निरीक्षण में क्या मिला
निरीक्षण के बाद कोर्ट को बताया गया कि ज्यादातर क्षेत्रों में या तो जगह खाली थी या लाइसेंसधारी फेरीवाले थे, लेकिन कोलाबा के कुछ हिस्सों में लाइसेंस की वैधता पर सवाल उठे।
■ याचिकाओं में गंभीर आरोप
गोरेगांव Merchants Association सहित कई याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि प्रशासन सड़क विक्रेताओं के कानूनों को लागू करने और पैदल चलने वालों के लिए रास्ता खाली रखने में विफल रहा है।
याचिका में गोरेगांव वेस्ट रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों में “अराजकता और गुंडागर्दी” का भी उल्लेख किया गया।
■ मिलीभगत पर कोर्ट की टिप्पणी
अदालत ने अधिकारियों और फेरीवालों के बीच संभावित मिलीभगत की आशंका जताई। निरीक्षण के दौरान Flora Fountain पर फेरीवालों के गायब मिलने पर कोर्ट ने कहा कि किसी ने पहले से सूचना दी होगी।
कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “या तो आप अक्षम हैं या फेरीवालों के साथ मिले हुए हैं।”
■ पुलिस और बीएमसी को चेतावनी
पुलिस ने लाइसेंस जांच की शक्ति न होने की दलील दी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया और नियमित पेट्रोलिंग के निर्देशों की याद दिलाई।
साथ ही बीएमसी को “फर्जी और दिखावटी” दस्तावेज दाखिल करने से भी आगाह किया गया।
■ अगली सुनवाई
अदालत ने राज्य सरकार को अब तक के आदेशों के पालन की विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी।


