■ ठाणे, बारामती और नासिक के अस्पतालों व आईवीएफ केंद्रों पर तलाशी, बैंक लॉकर और म्यूचुअल फंड निवेश फ्रीज; फर्जी दस्तावेजों के जरिए महिलाओं से बार-बार अंडाणु निकलवाने का आरोप।
मुंबई वार्ता संवाददाता

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई जोनल कार्यालय-द्वितीय ने अवैध रूप से मानव अंडाणु निकालने और उनकी आपूर्ति करने वाले संगठित गिरोह की जांच के सिलसिले में महाराष्ट्र के ठाणे, बारामती और नासिक में 10 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई 16 अक्टूबर 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई। तलाशी के दौरान 29 लाख रुपये नकद जब्त किए गए। इसके अलावा बैंक लॉकर और म्यूचुअल फंड में किए गए निवेश को फ्रीज कर दिया गया।


जांच एजेंसी को मामले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी मिले हैं।ईडी ने यह जांच महाराष्ट्र के ठाणे जिले के बदलापुर पूर्व पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी और उसके बाद दाखिल आरोपपत्र के आधार पर शुरू की थी। मामले में मंजुषा वानखेड़े और 16 अन्य लोगों पर धोखाधड़ी, जालसाजी तथा अन्य कथित अनियमितताओं के आरोप हैं। इनमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के तहत अपराधों के साथ-साथ सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 और औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के प्रावधानों के उल्लंघन का मामला भी शामिल है।
■ आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को बनाया जाता था निशाना
ईडी की जांच के अनुसार, इस गिरोह का कथित तौर पर एक संगठित नेटवर्क था, जो आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को मानव अंडाणु दान करने के लिए तैयार करता था। इसके बाद इन महिलाओं के अंडाणुओं की आपूर्ति विभिन्न आईवीएफ केंद्रों और सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (एआरटी) बैंकों को की जाती थी। इस काम में अलग-अलग प्रतिष्ठानों के तहत काम करने वाले दाता-आपूर्ति एजेंटों की भूमिका सामने आई है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, महिलाओं को अंडाणु दान के बदले आर्थिक भुगतान किया जाता था। यह रकम आईवीएफ केंद्रों और एआरटी बैंकों के माध्यम से एजेंटों द्वारा दी जाती थी। इस पूरी प्रक्रिया में एजेंटों को भी कमीशन मिलता था। जांच में ऐसे नए एजेंटों की पहचान भी की गई है, जिनकी भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
■ फर्जी आधार कार्ड और मेडिकल रिपोर्ट का इस्तेमाल
ईडी की जांच में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने का खुलासा हुआ है। इनमें आधार कार्ड, शपथपत्र, सहमति पत्र, जन्म प्रमाणपत्र, पैन कार्ड, रक्त जांच रिपोर्ट और बीमा संबंधी कागजात शामिल हैं।आरोप है कि इन दस्तावेजों के जरिए अंडाणु दान करने वाली महिलाओं की वास्तविक पहचान छिपाई जाती थी। साथ ही, महिलाओं से बार-बार अंडाणु दान करवाने और उन्हें चिकित्सकीय रूप से फिट दिखाने के लिए भी इनका इस्तेमाल किया जाता था।
जांच एजेंसी के अनुसार, महिलाओं को अंडाणु निकालने की प्रक्रिया के लिए महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के विभिन्न संस्थानों में भेजा जाता था। इस दौरान उनके स्वास्थ्य पर संभावित जोखिम पैदा होने के साथ ही निर्धारित चिकित्सकीय सुरक्षा मानकों को दरकिनार किए जाने की आशंका जताई गई है।
■ संपत्तियों और निवेश की भी जांच
छापेमारी के दौरान 29 लाख रुपये नकद जब्त करने के अलावा बैंक लॉकर और म्यूचुअल फंड निवेश को फ्रीज किया गया। जांच अधिकारियों ने मामले से संबंधित दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी बरामद किए हैं। इसके अतिरिक्त, पर्याप्त धनराशि से जुड़ी कई अचल संपत्तियों और निवेश की जानकारी सामने आई है, जिनकी जांच की जा रही है।ईडी अब इस कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, एजेंटों, आईवीएफ केंद्रों और एआरटी बैंकों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। मामले में आगे की जांच जारी है।


