मुंबई वार्ता संवाददाता

इमारतें ढहने और आग लगने से गईं सैकड़ों जानें, समुद्र, नालों और मैनहोल में गिरने से भी 251 लोगों की मौत; नागरिकों की सुरक्षा पर उठे सवालमुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आपातकालीन दुर्घटनाओं के कारण बड़े पैमाने पर जनहानि होने की जानकारी सामने आई है।


सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2020 से सितंबर 2026 तक लगभग साढ़े छह वर्षों में मुंबई में विभिन्न प्रकार की आपातकालीन दुर्घटनाओं में 720 लोगों की मौत हुई, जबकि 2,408 लोग घायल हुए।यह जानकारी सूचना अधिकार कार्यकर्ता शकील अहमद शेख द्वारा बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के आपातकालीन प्रबंधन विभाग से मांगी गई थी। विभाग के जन सूचना अधिकारी एवं सहायक अभियंता सुनील जाधव ने आरटीआई के तहत यह जानकारी उपलब्ध कराई।
■ किस दुर्घटना में कितने लोगों की मौत और कितने घायल हुए?
महानगरपालिका से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न आपातकालीन दुर्घटनाओं में मृतकों और घायलों की संख्या इस प्रकार है।
* पेड़ और शाखाएं गिरने से: 22 लोगों की मौत, 306 घायल।
* भूस्खलन से: 39 लोगों की मौत, 33 घायल।
* मकान, दीवार और इमारतों के हिस्से गिरने से: 179 लोगों की मौत, 864 घायल।
* आग और शॉर्ट सर्किट से: 168 लोगों की मौत, 1,048 घायल।
* समुद्र या कुएं में गिरने से: 195 लोगों की मौत, 44 घायल।
* मैनहोल या नाले में गिरने से: 56 लोगों की मौत, 77 घायल।
* बिजली का करंट लगने से: 40 लोगों की मौत, 57 घायल।
इन आंकड़ों में मकान और इमारतों के हिस्से गिरने तथा आग और शॉर्ट सर्किट की घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने की बात सामने आती है। वहीं, समुद्र या कुएं में गिरने से संबंधित घटनाओं में भी मृतकों की संख्या काफी अधिक है।आपातकालीन दुर्घटनाओं की श्रेणी में पेड़ या शाखाएं गिरना अथवा गिरने की आशंका, भूस्खलन, इमारतों का ढहना, आग लगना, शॉर्ट सर्किट, गैस रिसाव, सड़कों पर तेल फैलना, समुद्र, नालों, नदियों, कुओं, खाड़ियों, खदानों और मैनहोल में गिरना तथा पक्षियों, जानवरों या लोगों के फंसने जैसी घटनाएं शामिल हैं।
■ जलस्रोतों, नालों और मैनहोल से जुड़े हादसों पर चिंता
आरटीआई कार्यकर्ता शकील अहमद शेख के अनुसार, समुद्र, नालों, नदियों, कुओं, खाड़ियों, खदानों और मैनहोल में गिरने से कुल 328 लोगों की मौत हुई। इनमें 237 पुरुष और 91 महिलाएं शामिल हैं।यह आंकड़ा खुले मैनहोल, नालों के आसपास मौजूद खतरों और जलस्रोतों के निकट सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े करता है। हालांकि, इस संख्या का मूल सरकारी रिकॉर्ड से अलग-अलग दुर्घटना श्रेणियों के साथ मिलान किया जाना आवश्यक है, ताकि आंकड़ों में किसी प्रकार की दोहरी गणना न हो।
■ नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रभावी उपायों की जरूरत
इन दुर्घटनाओं के मद्देनजर सवाल उठता है कि खुले मैनहोल, खतरनाक नालों, जर्जर इमारतों और आग से बचाव के लिए समय रहते कितने प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। दुर्घटना होने के बाद राहत और बचाव कार्य महत्वपूर्ण हैं, लेकिन संभावित खतरों की पहले से पहचान कर उन्हें दूर करना भी उतना ही आवश्यक है।शकील अहमद शेख ने इस संबंध में मुंबई महानगरपालिका आयुक्त और मुख्य अग्निशमन अधिकारी को पत्र लिखकर आपातकालीन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विशेष व्यवस्था करने की मांग की है।
उन्होंने खतरनाक स्थानों का नियमित निरीक्षण करने, खुले मैनहोल और नालों के आसपास सुरक्षा उपाय लागू करने, इमारतों की सुरक्षा की जांच करने तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को अधिक सक्षम बनाने पर जोर दिया है।आरटीआई से सामने आए इन आंकड़ों के आधार पर मुंबई में सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था, दुर्घटना रोकथाम और नागरिकों की जान बचाने के लिए किए जाने वाले उपायों की प्रभावशीलता की समीक्षा करने की आवश्यकता सामने आती है।


