मुंबई में पानी के टैंकरों की कालाबाजारी चरम पर, पानी के टैंकर 25 हजार रुपये में बेचने के आरोप।

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श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मुंबई में पानी के टैंकरों की हड़ताल समाप्त हुए अभी दो दिन भी नहीं बीते हैं कि शहर में पानी के टैंकरों की कालाबाजारी के आरोप सामने आने लगे हैं। हड़ताल खत्म होने के बाद जहां नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद थी, वहीं कई इलाकों में टैंकर संचालकों द्वारा मनमाने दाम वसूलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि टैंकर माफिया अब पानी की आपूर्ति को कमाई का बड़ा जरिया बनाकर आम नागरिकों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं।


गुरुवार रात दक्षिण मुंबई के प्रभादेवी क्षेत्र की एक आवासीय सोसायटी में अचानक पानी की किल्लत उत्पन्न हो गई। सोसायटी प्रबंधन ने जब निजी टैंकर संचालकों से संपर्क किया तो एक पानी के टैंकर की कीमत 25 हजार रुपये बताई गई। सोसायटी के पदाधिकारियों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में इसी क्षमता का टैंकर 6 से 8 हजार रुपये में उपलब्ध हो जाता था, जबकि छोटे टैंकरों की आपूर्ति 3 हजार रुपये तक में हो जाती थी।

■ हड़ताल के बाद बढ़े दाम, नागरिकों में नाराजगी


मुंबई में हाल ही में पानी के टैंकर संचालकों और प्रशासन के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर विवाद के चलते टैंकरों की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। राज्य सरकार और प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद हड़ताल समाप्त कराई गई थी। लेकिन अब आरोप लग रहे हैं कि हड़ताल खत्म होते ही कुछ टैंकर संचालकों ने पानी की आपूर्ति पर अपना नियंत्रण बढ़ाते हुए दरों में भारी वृद्धि कर दी है।


स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गर्मी और जल संकट के इस दौर में पानी जैसी बुनियादी जरूरत को लेकर खुलेआम मुनाफाखोरी की जा रही है। कई सोसायटियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को मजबूरी में ऊंचे दामों पर पानी खरीदना पड़ रहा है।

■ क्या है टैंकर विवाद की पृष्ठभूमि?


मुंबई महानगर क्षेत्र में हजारों आवासीय सोसायटियां और व्यावसायिक परिसर पानी की अतिरिक्त जरूरतों के लिए निजी टैंकरों पर निर्भर हैं। शहर में निर्माण कार्यों से लेकर बड़े आवासीय परिसरों तक पानी की मांग का एक बड़ा हिस्सा निजी टैंकरों के माध्यम से पूरा किया जाता है।


हाल के दिनों में टैंकर संचालकों ने विभिन्न प्रशासनिक नियमों और जलभराव केंद्रों से जुड़ी शर्तों का विरोध करते हुए आंदोलन शुरू किया था। इससे शहर के कई हिस्सों में पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। सरकार ने बातचीत के जरिए आंदोलन समाप्त कराया, लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या हड़ताल समाप्त होने के बाद प्रशासन टैंकरों की दरों पर नियंत्रण रखने में विफल साबित हो रहा है।


■ सरकार पर उठ रहे सवाल


विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि सरकार ने हड़ताल तो खत्म करा दी, लेकिन टैंकर माफिया पर अंकुश लगाने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं बनाई। उनका कहना है कि यदि पानी के टैंकरों की दरों पर निगरानी नहीं रखी गई तो मुंबई के लाखों नागरिकों को भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ेगा।


नागरिकों ने मांग की है कि सरकार तत्काल टैंकरों की अधिकतम दरें तय करे, कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करे और पानी की आपूर्ति व्यवस्था को पारदर्शी बनाए। साथ ही, पानी जैसी आवश्यक सेवा को निजी मुनाफाखोरी से बचाने के लिए विशेष नियंत्रण तंत्र विकसित किया जाए।
प्रशासन की अग्निपरीक्षा


मुंबई में मानसून की शुरुआत के बावजूद कई क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति का संकट बना रहता है। ऐसे में टैंकरों की कालाबाजारी के आरोप प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। अब देखना होगा कि सरकार और महानगरपालिका इस कथित मनमानी पर लगाम लगाने के लिए क्या कदम उठाती हैं और आम नागरिकों को राहत दिलाने में कितनी सफल होती हैं।

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