मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता और धुंध की स्थिति पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सार्वजनिक सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने पर सालभर लागू प्रतिबंध का पालन सुनिश्चित करने तथा अस्पतालों, स्कूलों, अदालतों और सरकारी कार्यालयों के आसपास स्थित शांत क्षेत्र (साइलेंस जोन) में पटाखों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।


अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका आदेश किसी एक त्योहार तक सीमित नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र में पूरे साल मनाए जाने वाले सभी त्योहारों पर लागू होगा।गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई में अदालत ने मुंबई में प्रदूषण की गंभीर स्थिति और प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से आदेशों के कथित कमजोर क्रियान्वयन पर नाराजगी जताई।
न्यायमूर्ति गिरिश एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला के. गोखले की पीठ ने कहा कि प्रदूषण की समस्या इतनी गंभीर हो गई है कि लोगों के लिए सुबह की सैर करना और सामान्य रूप से घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो रहा है। अदालत ने अधिकारियों को चेताया कि नागरिकों के स्वास्थ्य और मौलिक अधिकारों की रक्षा के मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
■ मुंबई का प्रदूषण दिल्ली से भी ज्यादा होने पर अदालत ने जताई चिंता
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि यह चिंताजनक है कि समुद्र से आने वाली हवाओं और खुले स्थानों के बावजूद मुंबई में प्रदूषण का स्तर दिल्ली से भी अधिक बताया जा रहा है। अदालत ने मंगलवार को दृश्यता 500 मीटर से नीचे चले जाने की खबरों का भी उल्लेख किया। न्यायमूर्ति कुलकर्णी ने सवाल उठाया कि जब लाखों नागरिक प्रदूषण से प्रभावित हो रहे हैं, तो संबंधित विभागों के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को लेकर गंभीरता क्यों नहीं दिखा रहे हैं।अदालत ने कहा कि पटाखों से निकलने वाला धुआं, विषैले तत्व और सूक्ष्म कण पहले से खराब वायु गुणवत्ता को और बिगाड़ते हैं। इसका असर बच्चों, बुजुर्गों, बीमार व्यक्तियों और आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। अदालत के अनुसार, कुछ मिनटों के मनोरंजन के लिए नागरिकों के स्वास्थ्य को खतरे में नहीं डाला जा सकता।
■ बीएमसी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पुलिस को सख्त निर्देश
हाईकोर्ट ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी), महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल और मुंबई पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे फोड़ने और त्योहारों के जुलूसों में ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों के उल्लंघन की शिकायतें सामने आ रही हैं।अदालत ने मुंबई पुलिस आयुक्त को सभी पुलिस थानों के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाने और प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने का निर्देश दिया। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि जुलूसों में ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल के लिए आवश्यक अनुमति ली जाए और निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन हो।
■ 26 अक्टूबर तक अनुपालन रिपोर्ट देने का निर्देश
अदालत ने बीएमसी आयुक्त और मुंबई पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे 26 अक्टूबर 2026 तक हलफनामा दाखिल कर बताएं कि पटाखों पर प्रतिबंध लागू करने और प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। संबंधित अधिकारियों को समाचार माध्यमों और सामाजिक माध्यमों के जरिए जनजागरूकता अभियान चलाने तथा नागरिकों को पटाखों के धुएं और शोर से होने वाले नुकसान की जानकारी देने को भी कहा गया है।
हाईकोर्ट ने चेतावनी दी कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों, विशेषकर संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वस्थ वातावरण के अधिकार की रक्षा में लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। अदालत का स्पष्ट संदेश है कि त्योहार मनाने की स्वतंत्रता दूसरों के स्वास्थ्य और अधिकारों की कीमत पर नहीं हो सकती।


