मुंबई वार्ता संवाददाता

मानसून के दौरान मुंबई में लेप्टोस्पायरोसिस (Leptospirosis) के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। डॉक्टरों का कहना है कि यह संक्रमण सामान्य बुखार नहीं है, बल्कि समय पर इलाज न मिलने पर गंभीर रूप ले सकता है।


शार्दाकेयर हेल्थसिटी के इंटरनल मेडिसिन निदेशक डॉ. चिराग टंडन के अनुसार, लेप्टोस्पायरोसिस लेप्टोस्पाइरा (Leptospira) नामक बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है। यह बैक्टीरिया मुख्य रूप से संक्रमित जानवरों, विशेषकर चूहों, के मूत्र में पाया जाता है।
उन्होंने बताया कि भारी बारिश और बाढ़ के दौरान संक्रमित मूत्र बारिश के पानी और सीवर के पानी में मिल जाता है, जिससे संक्रमण तेजी से फैलने का खतरा बढ़ जाता है। यदि यह दूषित पानी शरीर पर मौजूद कट, घाव या आंख, नाक और मुंह जैसी श्लेष्मा झिल्लियों (म्यूकस मेम्ब्रेन) के संपर्क में आ जाए तो व्यक्ति संक्रमित हो सकता है।
डॉ. टंडन ने चेतावनी दी कि जलभराव वाले इलाकों में नंगे पैर चलना या थोड़ी देर तक भी दूषित पानी में रहना संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकता है। उन्होंने लोगों से बारिश के दौरान सावधानी बरतने, जलभराव वाले क्षेत्रों से बचने, जूते पहनकर बाहर निकलने और बुखार, शरीर में दर्द, सिरदर्द या अन्य लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान सतर्कता और समय पर उपचार ही लेप्टोस्पायरोसिस जैसी गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।


