मुंबई में स्वास्थ्य सेवाओं का होगा बड़ा बदलाव, बीएमसी बनाएगी चरणबद्ध नई स्वास्थ्य नीति : आयुक्त अश्विनी भिडे।

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मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) नागरिकों को विश्वस्तरीय, सुलभ, किफायती और जवाबदेह स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए व्यापक एवं चरणबद्ध स्वास्थ्य नीति तैयार करेगी। इस संबंध में बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे ने स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। नई नीति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल तकनीक, स्वच्छता, मानव संसाधन प्रबंधन और सेवा गुणवत्ता सुधार जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया जाएगा।


बीएमसी मुख्यालय में आयोजित विशेष समीक्षा बैठक में आयुक्त अश्विनी भिडे ने कहा कि मुंबई की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक नागरिक-केंद्रित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से सुधार लागू किए जाएंगे। बैठक में अतिरिक्त आयुक्त प्राजक्ता वर्मा-लवंगारे, उप आयुक्त शरद उघड़े, प्रशांत गायकवाड़, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रमुख अस्पतालों के निदेशक डॉ. शैलेश मोहिते, कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दक्षा शाह सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

■ पहले चरण में ये होंगे प्रमुख सुधार


नई नीति के पहले चरण में सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में नागरिक चार्टर प्रदर्शित किया जाएगा। अस्पतालों में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा, शिकायतों के त्वरित निपटारे की व्यवस्था विकसित होगी और एचएमआईएस (हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। इसके साथ ही अस्पताल सेवाओं की निगरानी के लिए डिजिटल डैशबोर्ड शुरू किया जाएगा तथा ‘स्मार्ट एवं डिजिटल ओपीडी’ लागू कर मरीजों का प्रतीक्षा समय कम किया जाएगा।


सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी लाइसेंस और अनुमति प्रक्रियाओं को भी अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से नियमों के पालन की निगरानी की जाएगी। चिकित्सा क्षेत्र की रिक्तियों पर भर्ती, प्रमुख अस्पतालों में स्वास्थ्य बीमा सहायता कक्ष की स्थापना और आपातकालीन स्थिति में आवश्यक दवाओं की तत्काल उपलब्धता भी पहले चरण का हिस्सा होगी।

■ दूसरे चरण में एआई और ऑनलाइन बेड आवंटन


दूसरे चरण में प्रायोगिक आधार पर ऑनलाइन बेड आवंटन प्रणाली शुरू की जाएगी, जिससे प्रतीक्षा सूची में शामिल मरीजों को अस्पतालों में बेड उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज होगी। छोटे उपचारों के लिए मरीजों को उपनगरीय अस्पतालों की ओर भेजने की व्यवस्था विकसित की जाएगी और प्रत्येक बीएमसी वार्ड में 24 घंटे, सप्ताह के सातों दिन चलने वाले क्लिनिक शुरू करने की योजना पर काम होगा।


इसके अलावा सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को उपचार के लिए 50 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। अस्पताल कर्मचारियों को व्यवहार कौशल, चिकित्सा नैतिकता और सेवा गुणवत्ता का प्रशिक्षण दिया जाएगा तथा उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया जाएगा।


इस चरण में रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी और संसाधन प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा।

■ तीसरे चरण में गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मानक


तीसरे चरण में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके तहत एनएबीएच (NABH) मान्यता, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, सभी पात्र मरीजों को स्वास्थ्य बीमा सुविधा, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, रिक्त पदों की शीघ्र भर्ती, दिव्यांग-अनुकूल स्वास्थ्य सुविधाएं, अस्पतालों में बेड प्रबंधन प्रणाली, कर्मचारियों के लिए नैतिकता एवं सहानुभूति प्रशिक्षण तथा हेल्थ कमांड सेंटर और समग्र डिजिटल डैशबोर्ड स्थापित करने की योजना है।


बीएमसी का मानना है कि इस चरणबद्ध स्वास्थ्य सुधार योजना से मुंबई की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था अधिक प्रभावी, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनेगी तथा मुंबई देश की आदर्श शहरी स्वास्थ्य व्यवस्था के रूप में स्थापित हो सकेगी।

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