मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई के पूर्व उपमहापौर एवं शिवसेना के वरिष्ठ नेता बाबूभाई भवानजी ने देश के विकास में सकारात्मक सोच और रचनात्मक राजनीति की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भारत आज विकास के एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। ऐसे समय में हर नागरिक का दायित्व है कि वह अफवाहों, भ्रम और नकारात्मकता से दूर रहकर राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए।


जारी प्रेस विज्ञप्ति में भवानजी ने कहा कि भारत केवल भौगोलिक सीमाओं का देश नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की सनातन संस्कृति, ज्ञान, परंपरा, संघर्ष और सामर्थ्य का प्रतीक है। अनेक चुनौतियों का सामना करने के बावजूद भारत ने हर संकट पर विजय प्राप्त की है और आज विश्व में नई पहचान स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का निर्माण सैनिकों के समर्पण, किसानों के परिश्रम, वैज्ञानिकों के अनुसंधान, उद्यमियों के संघर्ष, श्रमिकों की मेहनत और युवाओं के सपनों के सामूहिक योगदान से हो रहा है।


भवानजी ने कहा कि आज सूचना के तीव्र युग में सकारात्मक विचार समाज को प्रेरित करते हैं, जबकि अफवाहें, अधूरी जानकारी और घृणा फैलाने वाली भाषा समाज की एकता और विश्वास को कमजोर करती हैं। उन्होंने इसे “नकारात्मक विचारों की महामारी” बताते हुए कहा कि ऐसी प्रवृत्तियां विकास की गति में बाधा उत्पन्न करती हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि “झुरल जैसे नकारात्मक विचार” किसी व्यक्ति या समूह के लिए नहीं, बल्कि उन प्रवृत्तियों का प्रतीक हैं जो भ्रम, संघर्ष और राष्ट्रहित से अधिक तात्कालिक राजनीतिक लाभ को महत्व देती हैं। समाज को ऐसी मानसिकता से सावधान रहने की आवश्यकता है।
लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका पर बोलते हुए भवानजी ने कहा कि सत्ता से सवाल करना, नीतियों की समीक्षा करना और जनता की समस्याओं को उठाना लोकतंत्र की शक्ति है, लेकिन विपक्ष की भूमिका तथ्यपरक, रचनात्मक और राष्ट्रहित में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती केवल विरोध करने में नहीं, बल्कि बेहतर विकल्प और समाधान प्रस्तुत करने में है।
उन्होंने कहा कि देश के सामने रोजगार, किसानों की समृद्धि, उद्योगों को बढ़ावा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और वैश्विक स्तर पर भारत की मजबूत पहचान जैसी अनेक महत्वपूर्ण चुनौतियां और अवसर हैं। राजनीति का केंद्र इन्हीं मुद्दों पर होना चाहिए।
भवानजी ने कहा कि जब राजनीति केवल आरोप-प्रत्यारोप, कटु भाषा और टकराव तक सीमित हो जाती है, तब “राजनीतिक विष का आकर्षण” पैदा होता है, जिससे जनता के वास्तविक मुद्दे पीछे छूट जाते हैं और समाज की सकारात्मक ऊर्जा कमजोर होती है।
उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे अफवाहों के बजाय सत्य, घृणा के बजाय एकता और नकारात्मकता के बजाय विकास का मार्ग अपनाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य केवल राजनीतिक नारों या विरोध से नहीं, बल्कि नागरिकों के विश्वास, परिश्रम और सकारात्मक सोच से निर्मित होगा।
अपने संदेश के अंत में बाबूभाई भवानजी ने कहा कि कोई भी विजय किसी एक व्यक्ति की नहीं होती, बल्कि वह भारत माता, देश की जनता और उज्ज्वल भविष्य की विजय होती है।
उन्होंने सभी नागरिकों से छत्रपति शिवाजी महाराज के ‘हिंदवी स्वराज्य’ के स्वप्न को साकार करने के लिए एकजुट होकर राष्ट्रहित में कार्य करने का आह्वान करते हुए “जय हिंद, जय महाराष्ट्र” का संदेश दिया।


