श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता
मुंबई की झुग्गी-झोपड़ियों में 14 फीट से ऊपर बने निर्माणों को तोड़े जाने (डिमोलिशन) की मीडिया और अखबारों में आ रही खबरों के बाद क्षेत्र में डर और अनिश्चितता का माहौल बन गया है। यह आरोप लगाते हुए अबू आसिम आजमी ने कहा कि,”मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर के बीच मुंबई में 14 फीट से ऊपर बने करीब 39,000 घरों पर डिमोलिशन की कार्रवाई करने पर विचार कर रही है।”

■ अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल
अबू आसिम आजमी ने सरकार और बीएमसी/एसआरए प्रशासन से सवाल उठाते हुए कहा कि जब 1995 के बाद से अवैध झोपड़ों पर सख्त रोक और अधिकारियों पर जवाबदेही का नियम था, तो इतने सालों में 14 फीट से ऊंचे इतने सारे घर कैसे बन गए? उन्होंने कहा कि बिना अधिकारियों की मिलीभगत या शह के एक ईंट भी नहीं रखी जा सकती, इसलिए आम जनता को सजा देने के बजाय जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल पूछा जाना चाहिए।


■ लाखों लोगों के बेघर होने का खतरा
अबू आसिम आजमी ने चिंता जताते हुए कहा कि इन 39,000 बहुमंजिला (2 से 4 मंजिला) झुग्गियों में लाखों गरीब परिवार निवास कर रहे हैं। इन लोगों के पास वोटर कार्ड, राशन कार्ड और बिजली-पानी के वैध कनेक्शन मौजूद हैं और वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेकर सरकार चुनते हैं। ऐसे में अचानक बिना किसी ठोस पुनर्वास योजना के इन्हें बेघर करना मानवीय और सामाजिक दृष्टि से गलत होगा।
■ सरकार और मुख्यमंत्री से अपील
अबू आसिम आजमी ने मुख्यमंत्री, सरकार और एसआरए/बीएमसी कमिश्नर से अपील करते हुए कहा,” कार्रवाई पर रोक का तुरंत ऐलान करें: सरकार स्पष्ट बयान जारी कर लोगों के बीच फैले डर और खौफ को खत्म करे कि 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक ऐसा कोई डिमोलिशन नहीं होगा।”
■ स्लम-फ्री योजना के तहत समाधान निकालें
उन्होंने कहा कि तक मुंबई को स्लम-फ्री बनाने की योजना पूरी तरह लागू नहीं हो जाती और बिल्डरों के साथ बैठकर सही नीति तय नहीं हो जाती, तब तक किसी को बेघर न किया जाए।
■ मानवीय स्थिति का ध्यान रखें:
आजमी ने यह भी कहा कि घरों में बच्चों की परीक्षाएं, बुजुर्गों और मरीजों की बीमारियाँ जैसी व्यावहारिक समस्याएं हैं। अचानक तोड़फोड़ से स्थिति बेहद खराब हो सकती है।
अंत में उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि जनता में फैले भय को दूर करने के लिए तुरंत आधिकारिक बयान जारी किया जाए और किसी भी गरीब का घर न तोड़ा जाए।


