■ 50 करोड़ रुपये के लंबित सरकारी बिल मंजूर कराने का दिया था झांसा, 75 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग से खुला फर्जीवाड़े का राज।
मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) होने का झूठा दावा कर एक ठेकेदार से 3 करोड़ 25 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। आरोपी ने सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के लगभग 50 करोड़ रुपये के लंबित बिलों को मंजूर करवाने का लालच देकर ठेकेदार से कमीशन के नाम पर करोड़ों रुपये वसूल किए। इस मामले में मुंबई की मरीन ड्राइव पुलिस ने छत्रपति संभाजीनगर निवासी 40 वर्षीय आसिफ इस्माइल पठाण को गिरफ्तार किया है।


पुलिस के अनुसार, अकोला स्थित ओबेरॉय कंस्ट्रक्शन के ठेकेदार रणजीतसिंह ओबेरॉय के पीडब्ल्यूडी विभाग में लगभग 50 करोड़ रुपये के बिल लंबित थे। इसी का फायदा उठाकर आरोपी आसिफ पठाण ने खुद को मंत्रालय का वरिष्ठ अधिकारी और मुख्यमंत्री का विशेष कार्य अधिकारी बताया। उसने ठेकेदार को भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री कार्यालय में अपने संपर्कों के जरिए वह उनके लंबित बिलों को मंजूरी दिलवा सकता है। इसके बदले उसने कमीशन की मांग की।
आरोप है कि आरोपी ने अलग-अलग किस्तों में ठेकेदार से कुल 3.25 करोड़ रुपये वसूल किए। 10 सितंबर को ठेकेदार को मुंबई बुलाया गया, जहां आरोपी के कथित सहयोगी के माध्यम से 1.25 करोड़ रुपये लिए गए। इसके बाद भी पैसों की मांग जारी रही और आरोपी ने कथित तौर पर 2 करोड़ रुपये की अतिरिक्त रकम भी हासिल की।
■ 75 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग से खुला मामला
3.25 करोड़ रुपये देने के बावजूद जब आरोपी ने ठेकेदार से और 75 लाख रुपये की मांग की, तो उन्हें संदेह हुआ। इसके बाद 30 सितंबर को रणजीतसिंह ओबेरॉय ने मंत्रालय जाकर संबंधित अधिकारी के बारे में जानकारी हासिल की। वहां पता चला कि आसिफ पठाण नाम का कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री कार्यालय या मंत्रालय में उस पद पर कार्यरत नहीं है।इसके बाद ठेकेदार ने मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और छत्रपति संभाजीनगर से आरोपी आसिफ इस्माइल पठाण को गिरफ्तार कर लिया।
■ 6 नवंबर तक पुलिस हिरासत
आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 6 नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब इस मामले में शामिल अन्य संभावित सहयोगियों की तलाश कर रही है। साथ ही ठगी गई रकम की बरामदगी और वारदात में इस्तेमाल किए गए वाहन को जब्त करने की दिशा में भी जांच की जा रही है।
पुलिस को संदेह है कि आरोपी ने इसी तरीके से अन्य ठेकेदारों को भी निशाना बनाया हो सकता है। इसलिए जांच के दौरान ऐसे अन्य संभावित पीड़ितों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।


