राजनीतिक संन्यास के बाद मोहित कंबोज को मिला पुनर्विकास योजना का लाभ ! जुहू गल्ली की 101 एकड़ की परियोजना में उनकी संपत्तियां शामिल।

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■ अंधेरी पश्चिम की 57 आवासीय सोसायटियों और 13,228 झुग्गीवासियों का होगा पुनर्विकास।

■ कंबोज की कंपनी एस्पेक्ट रियल्टी की इमारतों को चार एफएसआई मिलने की संभावना, राजनीतिक संन्यास और कारोबारी फायदे के संबंधों पर उठे सवाल।

मुंबई वार्ता संवाददाता

भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय भूमिका से दूरी बनाने के बाद मोहित कंबोज की कारोबारी गतिविधियों को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। अंधेरी पश्चिम के जुहू गल्ली इलाके में प्रस्तावित 101 एकड़ की क्लस्टर स्लम पुनर्विकास योजना में उनकी कंपनी एस्पेक्ट रियल्टी द्वारा खरीदी गई इमारतों को शामिल किए जाने की खबर सामने आई है। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में यह सवाल खड़ा किया है कि क्या राजनीतिक संन्यास के बाद कंबोज को इस पुनर्विकास योजना से कारोबारी लाभ मिलने का रास्ता खुल रहा है?

हालांकि, राजनीतिक संन्यास और इस परियोजना में संपत्तियों के शामिल होने के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन निजी संपत्तियों को क्लस्टर योजना में शामिल किए जाने और उनसे मिलने वाले संभावित अतिरिक्त निर्माण अधिकारों ने इस मामले को चर्चा में ला दिया है।

प्रस्तावित पुनर्विकास परियोजना अंधेरी पश्चिम के गिल्बर्ट हिल और नवरंग सिनेमा से लेकर अंधेरी रेलवे स्टेशन के सामने स्थित स्वामी विवेकानंद मार्ग तक फैली हुई है। इस योजना में 57 सहकारी आवास समितियां और लगभग 13,228 झुग्गीवासी शामिल हैं। इसका उद्देश्य वर्षों से लंबित पुनर्विकास परियोजनाओं को एकीकृत ढांचे के तहत आगे बढ़ाना है।

इस परियोजना में मोहित कंबोज की कंपनी एस्पेक्ट रियल्टी द्वारा खरीदी गई इमारतों का शामिल होना सबसे महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है। बताया गया है कि यह कंपनी कथित तौर पर रिलायंस फोर आईवीआर से जुड़ी हुई है। इन इमारतों को क्लस्टर योजना में शामिल किए जाने से कंपनी को चार एफएसआई (फ्लोर स्पेस इंडेक्स) तक निर्माण की पात्रता मिल सकती है, जबकि स्वतंत्र पुनर्विकास में सामान्यतः 2.7 एफएसआई उपलब्ध होता है। इससे निर्माण क्षमता और परियोजना की आर्थिक संभावनाओं में बड़ा अंतर आ सकता है।हालांकि, विकास नियंत्रण नियमावली 33(11) के तहत भी चार एफएसआई हासिल करने का प्रावधान था, लेकिन इसके लिए डेवलपर को स्थायी वैकल्पिक पारगमन आवास उपलब्ध कराने जैसी शर्तें पूरी करनी पड़ती थीं।

क्लस्टर पुनर्विकास योजना में यह व्यवस्था बड़ी परियोजना के भीतर की जा सकती है। ऐसे में निजी इमारतों को इस योजना में शामिल किए जाने से उनके मालिकों को अतिरिक्त निर्माण क्षमता का लाभ मिलने की संभावना है।

एक डिजिटल समाचार माध्यम की रिपोर्ट के अनुसार, मोहित कंबोज ने स्वीकार किया है कि उनकी कंपनी ने संबंधित इमारतें खरीदी हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि एसआरए की ओर से झुग्गीवासियों का सर्वेक्षण जारी होने के कारण पुनर्विकास की प्रक्रिया में अभी तक विशेष प्रगति नहीं हुई है।वर्षों से अटकी है पुनर्विकास की प्रक्रियाइस क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से पुनर्विकास के 36 प्रस्ताव एसआरए के पास भेजे गए थे, लेकिन अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 57 सहकारी आवास समितियों में से अब तक केवल एक समिति के 277 झुग्गीवासियों का पुनर्वास हुआ है। वहीं, एक अन्य जारी परियोजना में 278 लोगों को आवास मिलने की उम्मीद है।रुकी हुई परियोजनाओं को दोबारा शुरू करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने अम्नेस्टी योजना लागू की थी। इसके तहत शिवइन्फ्रा विजन ने पिरामल कैपिटल को सह-विकासक बनाकर 23 सहकारी आवास समितियों के 4,034 झुग्गीवासियों के पुनर्वास की जिम्मेदारी ली है।

इन परियोजनाओं को भी अब बड़ी क्लस्टर योजना में शामिल किए जाने की संभावना है।अन्य प्रस्तावों में से 17 को बिना किसी उल्लेखनीय प्रगति के स्वीकार किया गया था, आठ मामलों में विकास अधिकार डेवलपर्स को दिए गए थे, छह परियोजनाएं अंतिम पात्रता सूची के चरण तक पहुंची थीं, जबकि दो प्रस्ताव अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किए गए थे।

■ रिलायंस के नेतृत्व वाले समूह को मिला पुनर्विकास का ठेका

इस परियोजना का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जून 2026 में रिलायंस 4आईआर रियल्टी डेवलपमेंट लिमिटेड के नेतृत्व वाले समूह ने 101.36 एकड़ की जुहू गल्ली क्लस्टर पुनर्विकास परियोजना की बोली जीती थी। इस समूह में एस्पेक्ट रियल्टी की सहायक कंपनी महादेव रियल्टर्स जुहू प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल है। इस परियोजना के लिए समूह ने एसआरए को रेडी रेकनर दर के मुकाबले 35.10 प्रतिशत प्रीमियम देने की पेशकश की थी।

मोहित कंबोज ने सितंबर 2025 में सक्रिय राजनीति से अलग होने की घोषणा करते हुए कहा था कि वह अपने कारोबार को अधिक समय देना चाहते हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया था कि वह भाजपा के सदस्य बने रहेंगे।

ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने के कारण ही सरकारी योजनाओं में कंबोज का कारोबारी विस्तार अब अधिक हो रहा है ? क्या जुहू गल्ली की क्लस्टर पुनर्विकास योजना उनकी कंपनी के लिए बड़े आर्थिक अवसर का माध्यम बनेगी? इन सवालों के जवाब परियोजना की शर्तों, संपत्तियों की पात्रता और पुनर्विकास से मिलने वाले वास्तविक लाभों से ही स्पष्ट होंगे।

फिलहाल, हजारों झुग्गीवासियों के पुनर्वास के उद्देश्य से बनाई गई इस महत्वाकांक्षी योजना में निजी संपत्तियों की भागीदारी और डेवलपर्स को मिलने वाले संभावित लाभों को लेकर पारदर्शिता बनाए रखना भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।

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