■ पुनर्विकास मामले पर योगी की सफाई
मुंबई वार्ता/वाराणसी

वाराणसी के दाल मंडी के पास मणिकर्णिका पुनर्विकास को लेकर उठे सियासी विवाद पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि विकास कार्यों के नाम पर मंदिरों या मूर्तियों को तोड़े जाने का दावा पूरी तरह झूठा और भ्रामक है। मुख्यमंत्री के अनुसार वाराणसी की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित है और विपक्ष द्वारा फैलाया जा रहा प्रचार जनता को गुमराह करने तथा विकास कार्यों को बाधित करने की कोशिश मात्र है।


ज्ञात हो कि वाराणसी के दाल मंडी इलाके में मणिकर्णिका घाट के पास चल रहे सड़क चौड़ीकरण और पुनर्विकास कार्य को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा मंदिरों और मूर्तियों को तोड़े जाने के आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन ने तीखा पलटवार किया है। सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा, भ्रामक और जनभावनाओं को भड़काने वाला करार दिया है।
सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अखिलेश यादव ने हिंदी में पोस्ट करते हुए लिखा, ‘धरोहरें मोतियों की तरह पिरोयी जाती हैं, तोड़ी नहीं संजोयी जाती हैं।’
उन्होंने कुछ तस्वीरें साझा कीं, जिनमें पुनर्विकास कार्य से पहले और बाद की कथित मूर्तियां दिखाई गईं। एक तस्वीर पर उन्होंने लिखा, ‘मलबे में दबी मिलीं अहिल्याबाई की प्रतिमा।’ इससे पहले भी अखिलेश यादव ने दाल मंडी परियोजना को लेकर भाजपा पर छोटे व्यापारियों और स्थानीय निवासियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया था।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दाल मंडी पुनर्विकास के दौरान किसी भी मंदिर या मूर्ति को तोड़े जाने के दावों का सख्ती से खंडन किया। उन्होंने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर वाराणसी में कथित मंदिर विध्वंस को लेकर झूठा प्रचार फैलाने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मणिकर्णिका घाट पर सभी मंदिर अपने मूल स्थान पर पूरी तरह सुरक्षित हैं।मुख्यमंत्री योगी ने यह भी दावा किया कि कुछ लोग मूर्ति निर्माण कार्यशालाओं से टूटी हुई मूर्तियों के अवशेषों की चुनिंदा तस्वीरें लेकर उन्हें सोशल मीडिया पर जानबूझकर फैलाते हैं।


