मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र में कुल 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव के लिए 15 जनवरी को मतदान होगा। इसके लिए आज से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। इन चुनावों में उम्मीदवारों को नामांकन पत्र के साथ एक विशेष शपथपत्र भी देना अनिवार्य होगा, जिसमें यह घोषणा करनी होगी कि वे नियमित रूप से शौचालय का उपयोग करते हैं।राज्य में 23 से 30 दिसंबर के बीच उम्मीदवार अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे।31 दिसंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी।2 जनवरी 2026 नाम वापसी की अंतिम तिथि है।3 जनवरी को उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी की जाएगी।15 जनवरी को मतदान होगा और 16 जनवरी को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।


मुंबई में 23 चुनाव अधिकारी कार्यालयमुंबई महानगरपालिका चुनाव के सुचारु संचालन के लिए 23 निर्वाचन निर्णय अधिकारी कार्यालय शुरू किए गए हैं। इन्हीं कार्यालयों में उम्मीदवारों के नामांकन स्वीकार किए जाएंगे। नामांकन के साथ अन्य जानकारियों के अलावा शौचालय उपयोग प्रमाणपत्र भी संलग्न करना होगा।स्वच्छ भारत अभियान के तहत शर्तस्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत केंद्र सरकार ने कुछ वर्ष पहले शहरी क्षेत्रों को खुले में शौच से मुक्त करने के उद्देश्य से यह शर्त लागू की थी। इसके अनुसार चुनाव लड़ने वाला प्रत्येक उम्मीदवार शौचालय का उपयोग करने वाला होना चाहिए। यह निर्णय 2017 की पालिका चुनावों से पहले लिया गया था।
हालांकि मुंबई पहले ही खुले में शौच मुक्त (ODF) घोषित हो चुकी है, फिर भी इस बार के चुनाव में भी यह शपथपत्र अनिवार्य किया गया है।यदि उम्मीदवार अपने स्वयं के घर में रहता है और वहां शौचालय है, तो उसका उल्लेख करना होगा।यदि वह किराए के घर में रहता है और वहां शौचालय है, तब भी प्रमाणपत्र देना होगा।और यदि घर में शौचालय नहीं है, तो यह बताना होगा कि वह सामुदायिक या सार्वजनिक शौचालय का नियमित उपयोग करता है।
शपथपत्र में ये विकल्प होंगे:
1. मैं अपने स्वामित्व वाले घर में रहता/रहती हूं, जहां शौचालय है और मैं उसका नियमित उपयोग करता/करती हूं।या
2. मैं अपने स्वामित्व वाले घर में नहीं रहता/रहती हूं, लेकिन जिस घर में रहता/रहती हूं वहां शौचालय है और मैं उसका नियमित उपयोग करता/करती हूं।या
3. मैं ऐसे घर में रहता/रहती हूं जहां शौचालय नहीं है, लेकिन मैं सामुदायिक/सार्वजनिक शौचालय का नियमित उपयोग करता/करती हूं।
यह नियम चुनाव प्रक्रिया में स्वच्छता के प्रति जागरूकता और जिम्मेदार नेतृत्व को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


