पंढरपुर /मुंबई वार्ता संवाददाता

वारकरी संप्रदाय और महाराष्ट्र मंदिर महासंघ ने 23 और 24 जून को पंढरपुर स्थित स्वयंभू श्री विट्ठल-रुक्मिणी की मूर्तियों पर प्रस्तावित एपॉक्सी और सिलिकॉन आधारित केमिकल कोटिंग का कड़ा विरोध किया है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि इस प्रक्रिया के कारण मूर्तियों को किसी प्रकार का नुकसान पहुंचता है, तो श्री विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर समिति और पुरातत्व विभाग के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए आपराधिक मामला दर्ज कराया जाएगा।


महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुनील घनवट ने प्रेस वार्ता में कहा कि कोरोना काल में मूर्तियों पर की गई केमिकल कोटिंग को 10 वर्षों तक सुरक्षित रहने वाला बताया गया था, लेकिन महज चार-पांच वर्षों में ही दोबारा कोटिंग की आवश्यकता पड़ गई। इससे इस प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अभी तक मंदिर समिति और पुरातत्व विभाग यह स्पष्ट नहीं कर पाए हैं कि लॉकडाउन के दौरान श्री विट्ठल की मूर्ति के पैर में छेद कैसे हुआ और माता रुक्मिणी के चरणों को क्षति क्यों पहुंची।


महासंघ का कहना है कि कृत्रिम रसायनों के प्रयोग से पत्थर की प्राकृतिक संरचना और उसकी “श्वसन प्रक्रिया” प्रभावित होती है, जिससे मूर्ति के अंदर से कमजोर और भंगुर होने का खतरा पैदा हो सकता है। संगठन ने कहा कि यदि संत-महंतों और उपासकों को विश्वास में लिए बिना एकतरफा निर्णय लिया गया, तो पूरे महाराष्ट्र में जनआक्रोश भड़क सकता है।
इस संबंध में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, जिला कलेक्टर और मंदिर समिति को ज्ञापन सौंपा गया है। प्रेस वार्ता में वारकरी पाइक संघ के एच.बी.पी. रामकृष्ण हनुमंत महाराज वीर, प्रज्ञापुरी ज्ञानपीठ अक्कलकोट के पीठाधिपति धर्माधिकारी प्रसाद पंडित, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के विनोद रसाल और हिंदू जनजागृति समिति के राजन बुंगे सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
■ महालक्ष्मी मंदिर का उदाहरण देकर उठाए सवाल
महासंघ ने सवाल उठाया कि वर्ष 2015 में कोल्हापुर स्थित श्री महालक्ष्मी देवी की मूर्ति पर केंद्रीय पुरातत्व विभाग ने बहेड़ा, दूर्वा अर्क और भिलावा तेल के मिश्रण से जैविक (सेंद्रिय) वज्रलेप किया था। उस समय मूर्ति के पत्थर के समान पत्थर के चूर्ण का उपयोग किया गया था। ऐसे में अब पंढरपुर के श्री विट्ठल की मूर्ति के लिए महंगी रासायनिक कोटिंग पर जोर क्यों दिया जा रहा है? महासंघ ने आशंका जताई कि इसके पीछे अधिक धन खर्च करने की मंशा हो सकती है।
■ शंकराचार्य पीठ ने भी जताई आपत्ति
करवीर पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य ने भी केमिकल वज्रलेप का विरोध करते हुए कहा कि जैसे शरीर पर रसायनों का दुष्प्रभाव पड़ता है, वैसे ही मूर्तियों पर भी पड़ सकता है। इसलिए रासायनिक वज्रलेप नहीं किया जाना चाहिए।
वारकरी पाइक संघ के एच.बी.पी. रामकृष्ण हनुमंत महाराज वीर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में मूर्तियों पर कई बार रासायनिक प्रयोग किए गए हैं और इससे नुकसान के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने मांग की कि किसी भी वैज्ञानिक प्रक्रिया से पहले उसकी नागरिक और आपराधिक जवाबदेही तय की जाए। यदि इस प्रक्रिया से श्री विट्ठल या माता रुक्मिणी की मूर्तियों को नुकसान पहुंचता है, तो संबंधित अधिकारियों और मंदिर समिति के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने तथा राष्ट्रीय धरोहर को नुकसान पहुंचाने के आरोप में कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


