मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई के संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान (एसजीएनपी) की सीमा में एक बार फिर अतिक्रमण का मामला सामने आया है। चांदिवली क्षेत्र में पुनर्वसित किए गए कुछ निवासियों द्वारा दोबारा राष्ट्रीय उद्यान की भूमि पर अवैध निर्माण किए जाने की पुष्टि होने के बाद उद्यान प्रशासन ने संबंधित लोगों को नोटिस जारी किया है। प्रशासन ने 27 जनवरी से अनधिकृत निर्माणों पर निष्कासन की कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया है।


उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय ने वर्ष 1997 में राष्ट्रीय उद्यान की सीमा में रह रहे निवासियों के पुनर्वास के आदेश राज्य सरकार को दिए थे। इसके तहत वर्ष 2008 में लगभग 11 हजार निवासियों को चांदिवली में आवास उपलब्ध कराए गए थे। हालांकि, तकनीकी कारणों से उस समय करीब 13 हजार निवासियों को आवास नहीं मिल सका और वे वहीं अवैध रूप से रहने लगे।कुछ वर्ष पहले एक स्वयंसेवी संस्था ने न्यायालय के आदेशों के पालन न होने को लेकर याचिका दायर की थी। इसके बाद अक्टूबर 2025 में इस मामले की निगरानी के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया, जो हर महीने स्थिति की समीक्षा कर रही है।


समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि चांदिवली में पुनर्वास के तहत घर पाने वाले कुछ लोगों ने अपने मकान बेच दिए या किराये पर देकर फिर से राष्ट्रीय उद्यान की सीमा में अवैध निर्माण कर लिया।इस मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने राज्य सरकार को तत्काल अवैध निर्माण हटाने के आदेश दिए। वर्तमान में अकेले बोरीवली क्षेत्र में करीब 350 अवैध निर्माण चिन्हित किए गए हैं। इसके अलावा मालाड, दहिसर और ठाणे क्षेत्रों में भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां पुनर्वासित आवासों को बेच या किराये पर देकर लोग अवैध रूप से रह रहे हैं।
इस बीच, प्रस्तावित कार्रवाई के विरोध में बुधवार को कुछ नागरिकों ने संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान कार्यालय के सामने मोर्चा निकाला और अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। इसके बावजूद प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 27 जनवरी से राष्ट्रीय उद्यान की सीमा में मौजूद सभी अनधिकृत निर्माणों पर निष्कासन की कार्रवाई की जाएगी।


