मुंबई महापौर पद ‘सामान्य महिला’ के लिए आरक्षित, राजनीतिक घमासान शुरू।

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मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के महापौर का बहुप्रतीक्षित पद लॉटरी प्रक्रिया के जरिए ‘सामान्य महिला’ श्रेणी के लिए आरक्षित किए जाने के बाद राज्य की राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) ने इस फैसले पर कड़ा एतराज जताते हुए आरक्षण की प्रक्रिया और उसके नतीजे—दोनों पर सवाल खड़े किए हैं।

लॉटरी के जरिए हुए इस आरक्षण के तहत महाराष्ट्र के कई प्रमुख नगर निकायों में महापौर पद महिलाओं के लिए आरक्षित घोषित किए गए हैं। इनमें पुणे, धुले, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी), नांदेड़, नवी मुंबई, मालेगांव, मीरा-भायंदर, नासिक और नागपुर शामिल हैं।

शिवसेना (उबाठा) का आरोप है कि आरक्षण प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही और इससे लोकतांत्रिक परंपराओं को ठेस पहुंची है। पार्टी नेताओं ने कहा कि इतने अहम पद के लिए आरक्षण तय करते समय सभी राजनीतिक दलों से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए थी। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ खेमे ने लॉटरी प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप और वैध बताते हुए विरोध को निराधार करार दिया है।

महापौर पद के आरक्षण को लेकर जारी यह विवाद आने वाले समय में स्थानीय निकाय चुनावों की राजनीति को और गरमा सकता है, खासकर मुंबई जैसे महत्वपूर्ण महानगर में, जहां बीएमसी की सत्ता का विशेष राजनीतिक महत्व माना जाता है।

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