मुंबई वार्ता संवाददाता

भाजपा और उसकी मातृसंस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को शुरू से ही भारतीय संविधान स्वीकार्य नहीं है। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा देश को दिया गया संविधान हटाकर मनुस्मृति थोपने का उनका एजेंडा कभी छिपा नहीं रहा। संविधान की उद्देशिका से ‘सेक्युलर’ और ‘सोशलिस्ट’ शब्द हटाने की संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले की हालिया मांग से यह बात एक बार फिर स्पष्ट हो गई है, ऐसा महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहां है।
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सपकाल ने कहा कि आरएसएस को भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाना है, यह बात उनके और भाजपा नेताओं के बयानों से बार-बार उजागर होती रही है। 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा नेताओं ने खुलेआम कहा था कि अगर वे 400 सीटें जीतते हैं तो संविधान बदल दिया जाएगा। स्वयं सरसंघचालक मोहन भागवत ने भी संविधान की समीक्षा की आवश्यकता बताई थी। प्रधानमंत्री मोदी के आर्थिक सलाहकार रहे विवेक देबरॉय ने भी सार्वजनिक रूप से संविधान बदलने की बात कही थी।
उन्होंने कहा कि हैरानी की बात यह है कि भाजपा और संघ परिवार की ओर से कभी इन बयानों का खंडन भी नहीं किया गया।संविधान, तिरंगा यह सब संघ को कभी स्वीकार्य नहीं रहा है, इसलिए उन्हें बदलने की कोशिश आज भी जारी है। सात महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट कहा था कि धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद संविधान की मूल आत्मा हैं, बावजूद इसके संघ और भाजपा के लोग लगातार भ्रम फैलाने वाले बयान देकर जनता को गुमराह कर रहे हैं। यह सब संविधान को बदलने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा है।भारत की पहचान विविधता में एकता है, लेकिन यही पहचान आरएसएस और भाजपा को खटकती है।
उनका स्पष्ट एजेंडा है – “हिंदू, हिंदी और हिंदू राष्ट्र”।लोकतंत्र और संविधान में विश्वास रखने वाले हर नागरिक को इस एजेंडे को समझना चाहिए और लोकतंत्र व संविधान की रक्षा के लिए हमेशा सजग रहना चाहिए, ऐसा आवाहन भी कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने किया।


