● शंकराचार्य भी गाय से उऋण नहीं हो सके.
● ‘सनातन की रक्षा हेतु गाय को बचाएं.
‘● ‘यज्ञ से सभी मनोकामना पूरी होती है’.
● ‘सनातन को नष्ट करने के लिए नष्ट कर रहे गाय’.
● बोरीवली में जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद के चातुर्मास्य की धूम.
कविता श्रीवास्तव /मुंबई वार्ता

गाय सामान्य प्राणी नहीं है। वह हमारी हर इच्छा को पूरी कर सकती है। गाय धरती का रुप है, उससे जो चाहो मिलेगा। ब्रह्मा ने हमें बनाया और हमारी समग्र इच्छाओं और आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए गौमाता को बनाया है। भगवान चल और अचल दोनों रूप में स्थित है। धरती भगवान विष्णु की अर्धांगिनी है। वह भू देवी हैं और गाय उनका ही चल रूप है। वह सबको अपने में समा लेती है। इसीलिए वह हमारी माता है। गाय सत्य अर्थात् सनातन धर्म का प्रतीक है। जो लोग सनातन धर्म को नष्ट करना चाहते हैं वे गाय को नष्ट कर रहे हैं। वही लोग गौहत्या कर रहे हैं। इसलिए सनातन धर्मानुयायियों का कर्तव्य है कि वे अपने धर्म की रक्षा के लिए गाय की रक्षा करें। यह बात परमधर्माधीश परमाराध्य ज्योतिषपीठाधीश्वर उत्तराम्नाय शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने यहां बोरीवली में चल रहे अपने चातुर्मास्य के अवसर पर अपने दिव्य आशीर्वचन में कही।


शंकराचार्य के दिव्य-भव्य चातुर्मास्य महामहोत्सव की इन दिनों बोरीवली में धूम मची हुई है। बोरीवली पश्चिम के कोरा केंद्र मैदान पर हो रहे हैं इस चातुर्मास्य महामहोत्सव में संतो के सानिध्य में आम श्रद्धालुजन बड़े उत्साह और उमंग के साथ प्रतिदिन रुद्राभिषेक, गौ-प्रतिष्ठा महायज्ञ, पादुका पूजन, शंकराचार्य के दिव्य आशीर्वचन आदि का आत्यंतिक श्रद्धामय वातावरण में लाभ उठा रहे है।


श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए जगद्गुरु शंकराचार्य ने यज्ञ के महात्मय को बताया। उन्होंने कहा कि सनातनधर्मी यज्ञ इसलिए करते हैं क्योंकि यज्ञ से सभी मनोकामना पूर्ण होती है। जब ब्रह्मा जी ने हम सबको धरती पर भेजा, तो उन्होंने हमारे साथ यज्ञ को भी भेजा है। जब हम प्रकट हुए तो हमारे साथ हमारा भाई यज्ञ भी प्रकट हुआ है। इस यज्ञ में अक्षत, तिल, जौ, गुड़, खांड, घी, सूखे मेवे, लकड़ियों का प्रयोग होता है। ये सभी चीजें गाय के माध्यम से ही प्राप्त होती हैं। दूध गायमाता देती है। उसी से घी बनता है। जबकि गाय का बछड़ा धरती को जोतता है जिससे सारी पोषक सामग्रियां उत्पन्न होती हैं। इसीलिए गाय हमारी सबसे बड़ी पोषक है। यज्ञ में हवि और मंत्र ही महत्वपूर्ण है। हवि यानी हवन सामग्री यानी समिधा हमें गाय उपलब्ध करा देती है। जबकि मंत्र उच्चारण का काम ब्राह्मण करते हैं। इसीलिए गौ-ब्राह्मण सनातन धर्म के लिए पूजनीय हैं।
जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि गाय माता केवल दूध ही नहीं देती है वह हमें तन, मन, संतान हर तरह का सुख देती है। गौमाता की आराधना से हर चीज प्राप्त होती है। गाय इसीलिए है। ब्रह्मा ने हमारी हर चीजों की जरूरत के लिए ही गाय को बनाया है। धरती की भांति वह हम सबको अपने आंचल में समा लेती है। तभी तो सबसे असंग रहने वाले शंकराचार्य भी गौमाता से उऋण नहीं हो सके।जगद्गुरु अविमुक्तेश्वरनंद सरस्वती ने कहा कि जिस-जिस ने सनातन धर्म को अपनाया है, गाय उन सबकी माता है। जो लोग सत्य सनातन धर्म के हैं, उन्हें गौमाता के मान-सम्मान और गौ प्रतिष्ठा के महत्व को समझना चाहिए। जो सनातन धर्म के नहीं है और सनातन धर्म को नष्ट करना चाहते हैं वे गाय को नष्ट कर रहे हैं। इसलिए गाय को बचाना प्रत्येक सनातनधर्मी का कर्तव्य है।
उल्लेखनीय है कि जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित कराने के उद्देश्य से देशव्यापी अभियान छेड़ा है। उनके इस अभियान को आम सनातनियों व गौभक्तों का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। इसी क्रम में उन्होंने 33 करोड़ गौ-प्रतिष्ठा महायज्ञ का संकल्प लिया है। बोरीवली के कोरा केंद्र में उनके चातुर्मास के दौरान 108 कुंडों पर शास्त्री-पंडितों के वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ब्राह्मणों के हाथों महायज्ञ लगातार जारी है।
मुंबईवासी आम श्रद्धालु, अन्य स्थानों से पधारे धर्मसेवी व गौभक्त इसमें अपनी आहुतियां डालकर गौमाता-प्रतिष्ठा के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी के अभियान का भरपूर समर्थन कर रहे हैं।स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के चातुर्मास के दौरान रुद्र महाभिषेक, गौ-प्रतिष्ठा महायज्ञ, पादुका पूजन, भगवान चंद्रमोलीश्वर पूजन व अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम भोर सुबह से देर शाम तक लगातार चल रहा है। आयोजकों ने समस्त श्रद्धालुओं से आयोजन स्थल पर पहुंचकर इसका पुण्य लाभ लेने की अपील की है।


