श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मुंबई के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक मंदिर की दानपेटी से कथित चोरी के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। इस मामले में गिरफ्तार किए गए कर्मचारियों को लेकर सिद्धिविनायक मंदिर न्यास के अध्यक्ष सदा सरवणकर ने दावा किया है कि आरोपी कर्मचारी शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) से जुड़े हुए थे। उनके इस बयान के बाद मुंबई की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।


कुछ दिन पहले मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पत्र लिखकर सिद्धिविनायक मंदिर में करोड़ों रुपये की कथित चोरी का आरोप लगाया था। इसी मुद्दे पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सदा सरवणकर ने कहा कि पत्र में किए गए दावों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि मंदिर में चोरी की घटना हुई थी, लेकिन यह भी कहा कि इस मामले का खुलासा और कार्रवाई स्वयं मंदिर न्यास ने की थी।


सरवणकर के अनुसार, जैसे ही मंदिर में अनियमितताओं की जानकारी मिली, न्यास ने तत्काल वरिष्ठ पुलिस अधिकारी विश्वास नांगरे पाटिल से संपर्क किया। पुलिस ने जांच और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर राजन पेंडुरकर, घाडीगावकर समेत नौ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया। उन्होंने बताया कि सभी आरोपी कुछ समय तक जेल में भी रहे थे।
सरवणकर ने आगे आरोप लगाया कि गिरफ्तार किए गए प्रमुख कर्मचारियों की नियुक्ति पूर्व महापौर विशाखा राऊत के कार्यकाल में हुई थी। उनका दावा है कि ये सभी कर्मचारी नियमित रूप से शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) की स्थानीय शाखा में आते-जाते थे और उस गुट के नेताओं के संपर्क में थे।
हालांकि, इन आरोपों पर शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की जांच पहले से जारी है और राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।


