■ आरक्षण के नाम पर मराठा और ओबीसी समाज को भिड़ाया गया, फडणवीस के शब्दों पर कितना भरोसा करेंगे?
मुंबई, दि. 4 सितंबर 2025

राज्य की महायुति सरकार ने हैदराबाद गॅजेट को मान्य करते हुए मराठा समाज को आरक्षण देने का शासन आदेश निकाला है। अगर सरकार हैदराबाद गॅजेट लागू करने जा रही है तो फिर तेलंगाना सरकार की तरह जातिवार जनगणना कर अपने राज्य के ओबीसी समाज को 42% आरक्षण देने का निर्णय देवेंद्र फडणवीस लेंगे क्या? ऐसा सवाल महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने किया है।


आरक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आगे कहा कि राज्य में आरक्षण का प्रश्न गंभीर है और फिलहाल मराठा और ओबीसी समाज के बीच आरक्षण को लेकर विवाद शुरू हो गए हैं। मराठा समाज को ओबीसी से आरक्षण दिया जाए, इस मांग के लिए महायुति सरकार ने हैदराबाद गॅजेट लागू करने का आदेश निकाला है। असल में देवेंद्र फडणवीस के शब्दों पर कितना भरोसा करना चाहिए, यही बड़ा प्रश्न है क्योंकि उनकी कई घोषणाएँ बाद में जुमले साबित हुई हैं। अब जब मराठा समाज को ओबीसी से आरक्षण मिलेगा, ऐसी चर्चा है, तो सरकार कह रही है कि ओबीसी समाज के आरक्षण को कोई धक्का नहीं लगेगा।


उन्होंने कहा कि अगर मराठा समाज को ओबीसी वर्ग से आरक्षण मिलेगा तो सरकार का यह दावा कि ओबीसी के आरक्षण को कोई धक्का नहीं लगेगा, खुद सवालों के घेरे में आता है। दोनों में से एक ही बात सही हो सकती है, दोनों सही कैसे हो सकती हैं? यह सरकार को स्पष्ट करना चाहिए, क्योंकि सरकार की भूमिका से दोनों समाज में भ्रम की स्थिति बनी है।भाजपा-युति सरकार को आरक्षण के नाम पर दो समाजोंको भिड़ाना चाहती है। आज महाराष्ट्र में वही तस्वीर दिख रही है। सरकार ने मराठा समाज की मांगें मानने की घोषणा की है तो ओबीसी समाज सड़कों पर उतर आया है।
मराठा समाज को आरक्षण मिलना ही चाहिए, यह कांग्रेस की स्थायी भूमिका है। आरक्षण देने के लिए जातिवार जनगणना ही रामबाण उपाय है। लेकिन भाजपा सरकार इस पर ज्यादा अनुकूल नजर नहीं आती। केवल जातिवार जनगणना की घोषणा करने से कुछ नहीं होगा, उसका क्रियान्वयन करना ही होगा, तभी आरक्षण के प्रश्न पर स्थायी समाधान निकल सकता है, ऐसा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा।


