मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा 14 फुट से अधिक ऊंची झोपड़ियों के खिलाफ 1 अक्टूबर से विशेष अभियान शुरू करने के फैसले पर मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद वर्षा गायकवाड़ ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने इसे गरीब और मेहनतकश लोगों को मुंबई से बेदखल करने की साजिश बताते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।


वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि बीएमसी की सीमा में करीब 90 लाख झोपड़ीवासी रहते हैं और मुंबई के लगभग 24 प्रतिशत भू-भाग पर झोपड़ियां बसी हुई हैं। शहर की कुल आबादी में झोपड़पट्टीवासियों की हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि मुंबई गरीब और मेहनतकश लोगों की मेहनत और पसीने से चलती है, लेकिन अब ऐसा लगता है कि भाजपा महायुति सरकार को यही गरीब जनता खटकने लगी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि महानगरपालिका में सत्तारूढ़ भाजपा और शिवसेना ने पहले 18 फुट तक की झोपड़ियों को संरक्षण देने का रुख अपनाया था, लेकिन अब अचानक 14 फुट से अधिक ऊंची झोपड़ियों को गिराने का फैसला क्यों किया गया? गायकवाड़ ने इसे तानाशाहीपूर्ण फैसला बताते हुए कहा कि 1 अक्टूबर से प्रस्तावित कार्रवाई गरीब झोपड़ीवासियों को मुंबई से स्थायी रूप से बेदखल करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
वर्षा गायकवाड़ ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों की तरह अब महानगरपालिका भी अपने ‘पसंदीदा मित्रों’ के हित में काम कर रही है। उनके मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों से स्थानीय लोगों, भूमिपुत्रों, गरीबों और मेहनतकश लोगों को मुंबई से बाहर करने की कोशिशें की जा रही हैं।
उन्होंने धारावी पुनर्विकास का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि पुनर्वास के नाम पर धारावीवासियों को मुंबई से बाहर करने का काम जारी है। अब बीएमसी ने झोपड़ीवासियों को बेघर करने की कार्रवाई भी शुरू करने का फैसला किया है। गायकवाड़ ने आरोप लगाया कि अडानी के लिए नियमों में बदलाव किए गए हैं और उनके लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि खुले मैदान, खेल के मैदान, नमक के खेत, मदर डेयरी की जमीन, डंपिंग ग्राउंड और हवाई अड्डे के आसपास की जमीन जैसे महत्वपूर्ण भूखंडों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठ रहे हैं।
गायकवाड़ ने कहा कि भाजपा महायुति सरकार और बीएमसी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर गरीब झोपड़ीवासियों को बेघर करने की जरूरत क्यों पड़ रही है। उन्होंने भाजपा और शिवसेना (शिंदे) से भी इस फैसले पर स्पष्टीकरण मांगा।
उन्होंने कहा कि झोपड़ियों पर किसी भी तरह की कार्रवाई करने से पहले वहां रहने वाले लोगों का उचित स्थान पर पुनर्वास किया जाना चाहिए। कांग्रेस गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें मुंबई से बाहर किए जाने का विरोध करती है। पहले पुनर्वास, फिर कार्रवाई की नीति अपनाई जानी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बीएमसी के इस अभियान पर तत्काल रोक लगाने की मांग दोहराई।


