श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई का हिस्सा होने के बावजूद गोराई-मनोरी क्षेत्र आज भी बुनियादी स्वास्थ्य और नागरिक सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। करीब 15 हजार की आबादी वाले इस इलाके में केवल 200 वर्गफुट का छोटा-सा दवाखाना और प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) की व्यवस्था है। गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसूति गृह तक नहीं है, ऐसे में स्थानीय लोगों ने यहां कम से कम 10 बेड का प्रसूति अस्पताल स्थापित करने की मांग उठाई है।


आर-सेंट्रल वार्ड के स्थानीय निवासियों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए समुद्र (खाड़ी) पार कर दूसरे इलाकों के अस्पतालों तक जाना पड़ता है, जिससे आपात स्थिति में उनकी और नवजात की जान जोखिम में पड़ जाती है। उनका कहना है कि मुंबई जैसे महानगर में यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।


स्थानीय नागरिकों ने यह मांग भी की है कि जेट्टी के माध्यम से गोराई खाड़ी पार कर पानी की पाइपलाइन बिछाई जाए, ताकि इलाके में पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान हो सके। ज्यादातर निवासी स्थानीय कुओं पर ही पेयजल के लिए निर्भर है।वहीं, पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध गोराई बीच पर सार्वजनिक शौचालय तक उपलब्ध नहीं हैं। बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं, लेकिन शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा के अभाव में उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इससे स्वच्छता व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
एक ओर मुंबई को विश्वस्तरीय शहर बनाने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर गोराई-मनोरी के लोगों को इलाज के लिए समुद्र पार करना पड़ता है और पर्यटकों को शौचालय तक नसीब नहीं। सवाल यह है कि आखिर विकास की रोशनी इस इलाके तक कब पहुंचेगी?


