■ शिवाजी महाराज से तुलना का आरोप झूठा.
मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ ने अपने एक बयान को लेकर मचे राजनीतिक विवाद पर सोशल मीडिया के जरिए कड़ा स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके 70 सेकंड के वक्तव्य के एक शब्द को संदर्भ से काटकर जानबूझकर गलत अर्थ में फैलाया गया और यह झूठा प्रचार किया गया कि उन्होंने छत्रपती शिवाजी महाराज की तुलना किसी अन्य ऐतिहासिक व्यक्तित्व से की है।


सपकाल ने स्पष्ट कहा कि सरकारी दफ्तरों में विभिन्न महापुरुषों के चित्र एक साथ लगाए जाने से समाज में टकराव नहीं, बल्कि एकता का संदेश जाना चाहिए—यही उनके बयान का मूल भाव था। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर चलाए गए भ्रामक अभियानों के जरिए वे बातें उनके मुंह में डाली गईं जो उन्होंने कही ही नहीं।उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और उससे जुड़े तत्वों ने इस अपप्रचार को योजनाबद्ध तरीके से फैलाया, जिससे राज्य में धार्मिक तनाव पैदा करने और दंगों जैसी स्थिति बनाने का प्रयास हुआ। पुणे की घटनाओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यह सब समाज को बांटने की राजनीति का हिस्सा है।


सपकाल ने दो टूक कहा, “छत्रपती शिवाजी महाराज का पराक्रम अद्वितीय है। वे मेरे आदर्श, प्रेरणा और स्वाभिमान हैं। उनकी तुलना का सवाल ही नहीं उठता।” उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल इतना कहा था कि टीपू सुल्तान ने शिवाजी महाराज से प्रेरणा लेकर अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया। इसके बावजूद, उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया।कांग्रेस नेता ने कहा कि उनके वक्तव्य का उद्देश्य समाज में सौहार्द बनाए रखना, परस्पर सम्मान और बंधुत्व को बढ़ावा देना था। इतिहास पर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन पर संयमित और अध्ययनपूर्ण चर्चा होनी चाहिए, न कि जाति-धर्म के नाम पर ध्रुवीकरण।
उन्होंने शिवप्रेमियों की भावनाएं आहत होने पर खेद जताते हुए माफी भी मांगी और अपील की कि शिवजयंती के मौके पर अपप्रचार से दूर रहें। अंत में सपकाळ ने कहा कि वे भाजपा की “विखारी राजनीति” और झूठे प्रचार के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे तथा महाराष्ट्र को शिवाजी महाराज के स्वराज्य, सहिष्णुता और लोककल्याण के मार्ग पर आगे ले जाने का संकल्प दोहराया।


