बाप्पा के आगमन से खुला रिद्धि-सिद्धि का द्वार

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10,000 करोड़ का होगा गणेशोत्सव में व्यापार

मुंबई (सं. भा.) गणपति बाप्पा, जिन्हें रिद्धि-सिद्धि के दाता के रूप में पूजा जाता है, उनके आगमन के साथ ही हिंदुस्थान के व्यापारियों के लिए समृद्धि का द्वार खुलता है। गणेशोत्सव से शुरू होकर होली तक का समय व्यापारिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण होता है। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के अनुसार, इस वर्ष गणेशोत्सव के दौरान करीब 10,000 रुपए करोड़ का कारोबार होने की संभावना है। यह गणेशोत्सव व्यापार के उत्सव की शुरुआत मानी जाती है, जो दीपावली से लेकर होली तक चलता रहता है।

भारतीय उत्पादों की बढ़ी मांग, चीन के प्रोडक्ट को किया नकार

सीएआईटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया के अनुसार, इस वर्ष गणेशोत्सव में चीन के उत्पादों को बड़े पैमाने पर नकारा गया है, जिससे भारतीय उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। गणेश प्रतिमाओं का व्यापार इस बार 500 करोड़ रुपए से अधिक का होने का अनुमान है। इसके अलावा पूजा सामग्री, फूल, माला, नारियल और धूप जैसे उत्पादों का व्यापार भी लगभग 500 करोड़ रुपए का होने की उम्मीद है। मिठाइयों और अन्य घरेलू सामग्रियों की बिक्री में 2,000 करोड़ से अधिक की बढ़ोतरी देखी गई है।

गणेशोत्सव में 20 लाख से अधिक पंडाल, बड़े स्तर पर होगा खर्च

गणेशोत्सव के दौरान पूरे देश में लगभग 20 लाख से अधिक गणेश पंडाल स्थापित किए गए हैं, जिनमें महाराष्ट्र में सबसे अधिक 7 लाख पंडाल लगाए गए हैं। इसके बाद कर्नाटक में 5 लाख, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और मध्य प्रदेश में 2-2 लाख पंडाल लगाए गए हैं। हर एक पंडाल पर औसतन 50,000 रुपए का खर्च होने का अनुमान है, जिसमें सजावट, ध्वनि प्रणाली, गणेश प्रतिमा और अन्य आयोजन शामिल हैं। इन आयोजनों से गणेशोत्सव के दौरान कुल 10,000 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार होने की संभावना जताई जा रही है।

कैटरिंग और मिठाई व्यापार में भारी उछाल

गणेशोत्सव के दौरान बड़े पैमाने पर समारोहों और आयोजनों के चलते कैटरिंग सेवाओं की मांग में भारी वृद्धि देखी गई है। अकेले कैटरिंग का व्यापार इस गणेशोत्सव के दौरान 3,000 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। इसके अलावा, पारंपरिक मिठाइयों की बिक्री में भी उछाल आया है, जिससे मिठाई व्यवसायियों के लिए यह समय लाभकारी साबित हो रहा है।

गणेशोत्सव से होली तक व्यापार की सुनहरी राह

गणेशोत्सव के साथ ही हिंदुस्थान के व्यापारियों के लिए एक लंबे व्यापारिक सीजन की शुरुआत हो जाती है, जो दीपावली, नवरात्रि, और होली जैसे त्योहारों तक चलता है। इस दौरान हर तरह के व्यापार में तेजी देखने को मिलती है, चाहे वह सजावट का सामान हो, मिठाइयाँ हों या फिर कैटरिंग की सेवाएँ। गणपति बाप्पा की कृपा से यह समय व्यापारियों के लिए न केवल आर्थिक दृष्टि से बल्कि मानसिक रूप से भी समृद्धि और शुभता का प्रतीक बनता है।

गणेशोत्सव से शुरू होने वाला यह व्यापारिक सीजन सिर्फ कारोबार ही नहीं, बल्कि उम्मीदों और अवसरों का प्रतीक है। गणपति बाप्पा के आगमन से लेकर होली तक का यह समय, छोटे और बड़े व्यापारियों के लिए न केवल आर्थिक लाभ का, बल्कि समाज और संस्कृति के साथ उनके जुड़ाव का अवसर भी है। इस अवधि में व्यापारी न केवल अपने कारोबार को बढ़ाते हैं, बल्कि समाज में खुशहाली और उल्लास का भी हिस्सा बनते हैं। यह समय रिद्धि-सिद्धि का वह पर्व है, जो व्यापार और उत्सव दोनों को समान रूप से समृद्धि का मार्ग दिखाता है।

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