मुंबई (सं. भा.) कहावत है ‘अंधे को क्या चाहिए, एक आंख’ । लगभग 5 साल से अमर संजय पुकले नामक आरोपी धोखाधड़ी के आरोप में लगभग 5 साल से जेल में बंद था। उसे निचली अदालतों से जमानत तक नही मिल रही थी। आरोपी के वकील एडवोकेट सिद्धांत भीमराव कुसाळकर और एडवोकेट ईशा सगलानी की अकाट्य तर्कों को सुनने के बाद उसे बॉम्बे हाई कोर्ट से जमानत मिल गई। बात ढें कि शुक्रवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 406 और 467 के आरोप में दिसंबर 2019 से जेल में बंद अमर संजय पुकले को ज़मानत दे दी। आरोपी के वकील, एडवोकेट सिद्धांत भिमराव कुसाळकर और एडवोकेट ईशा सगलानी ने माननीय न्यायालय के समक्ष दलीलें पेश कीं, जिसमें दो बार सुनवाई में तेजी लाने के बावजूद मुकदमे की धीमी प्रगति पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने तर्क दिया कि लगभग पाँच वर्षों तक जेल में रहना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आरोपी के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। मजिस्ट्रेट कोर्ट और सत्र न्यायालय द्वारा अमर संजय पुकले की कई बार जमानत अस्वीकृत किए जाने के बावजूद, माननीय उच्च न्यायालय प्रस्तुत तर्कों से सहमत था और कहा कि आरोपी के पिछले रिकॉर्ड के बावजूद, वह ज़मानत पर रिहा होने का हकदार है।
5 साल से जेल में बंद आरोपी को वकील जमानत दिलवाने में हुए कामयाब
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