- शारीरिक और मानसिक बीमारियों की जड़ बनता मोटापा, विशेषज्ञों ने जताई चिंता
मुंबई (सं. भा.) आधुनिक जीवनशैली और अस्वास्थ्यकर खानपान के कारण तेजी से बढ़ रहे मोटापे ने न केवल शारीरिक बीमारियों, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को भी जन्म दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, मोटापे के कारण लोग मानसिक रूप से अधिक प्रभावित हो रहे हैं, जिससे अवसाद, तनाव और चिंता जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। मनोचिकित्सक मोटापे के इस बढ़ते खतरे को लेकर गंभीर चिंता जता रहे हैं।
मोटापा मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी गंभीर शारीरिक बीमारियों को जन्म देता है, लेकिन साथ ही यह मानसिक समस्याओं को भी बढ़ाता है। मनोचिकित्सक डॉ. विजय साळुंखे के अनुसार, अधिक वजन मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालता है, जिससे अवसाद, चिंता और तनाव जैसी मानसिक बीमारियां उत्पन्न होती हैं। मोटापा कई कारकों के कारण होता है, जिनमें अनुवांशिकी, अस्वास्थ्यकर जीवनशैली और मानसिक तनाव प्रमुख हैं।
खान-पान और मोटापा
मोटापे से जूझ रहे लोगों में अत्यधिक खाने की प्रवृत्ति आम होती है, जो अक्सर नकारात्मक भावनाओं से निपटने के लिए ज्यादा भोजन का सेवन करते हैं। इससे उनका वजन बढ़ता जाता है, और वे अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों के आदी हो जाते हैं। चिंता और मोटापे का गहरा संबंध है, क्योंकि तनावग्रस्त व्यक्ति ज्यादा खाने की ओर झुकाव रखते हैं। साथ ही, शराब और नशीली दवाओं का सेवन भी मोटापे का एक बड़ा कारण है, जो स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालता है।

मोटापे के मानसिक प्रभाव से निपटने के उपाय
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य और मोटापे से निपटने के लिए जीवनशैली में बदलाव करना अत्यंत आवश्यक है। परामर्श और संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (CBT) जैसे उपचार विधियां व्यक्तियों को नकारात्मक सोच से बाहर निकलने में मदद कर सकती हैं। कुछ मामलों में, अवसाद और चिंता को कम करने के लिए एंटीडिप्रेसेंट दवाओं का उपयोग भी किया जा सकता है।
इसके अलावा, नियमित शारीरिक गतिविधि एंडोर्फिन के स्तर को बढ़ाकर मूड को बेहतर बना सकती है। ध्यान और योग जैसी गतिविधियां मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकती हैं। विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाए रखना ही मोटापे और उससे जुड़ी मानसिक समस्याओं का प्रभावी समाधान है।


