पानी का समाधान: जवाई बांध से झगड़े नहीं, पांच नए बांधों की मांग हो

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जोधपुर/मुंबई वार्ता संवाददाता

पश्चिमी राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में जल संकट ने विकराल रूप धारण कर लिया हैं। जालोर के किसान जवाई बांध से निकलने वाली जवाई नदी के पानी को लेकर पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना हैं कि यदि जवाई नदी में पानी छोड़ा जाए तो उनके खेतों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा। यह आंदोलन किसानों की जल जरूरतों को लेकर एक गंभीर मुद्दा उठाता हैं, लेकिन बड़ा सवाल यह हैं कि क्या केवल जवाई बांध से इस समस्या का समाधान हो सकता है?

वित्त और जल प्रबंधन के विशेषज्ञ भरतकुमार सोलंकी का मानना हैं कि जवाई बांध से पानी के संग्रहण को लेकर विवाद करना केवल तात्कालिक समाधान हैं। वे कहते हैं कि जवाई नदी का बहाव रोकने से जल संग्रहण तो हो रहा हैं, लेकिन यह केवल सीमित क्षेत्र के लिए फायदेमंद हैं। सोलंकी ने सवाल उठाया कि अरावली पर्वतमाला से निकलने वाली अन्य नदियों, जिनमें पानी का संग्रह नहीं किया गया हैं, पर कभी आंदोलन क्यों नहीं होता? ये नदियां बिना उपयोग किए बहकर सूख जाती हैं और उनकी अनदेखी से जल संकट और गहरा जाता हैं।

सोलंकी का सुझाव हैं कि अरावली पर्वतमाला में जवाई बांध जैसे कम से कम पांच नए बांध बनाए जाने चाहिए। इससे न केवल जालोर, बल्कि जोधपुर संभाग के सातों जिलों में पानी की स्थायी उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इन नए बांधों के निर्माण से पूरे मारवाड़ में खेतों की सिंचाई का समाधान हो सकता हैं, जिससे किसानों की आय में इजाफा और क्षेत्र का समग्र विकास संभव होगा।

उन्होंने बताया कि बरसात के पानी को संग्रह करने के लिए एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना होगा। यदि पूरे मारवाड़ में जल संसाधनों को संरक्षित करने और नई योजनाओं को लागू करने की रणनीति बनाई जाए, तो यह क्षेत्र हरित क्रांति का केंद्र बन सकता हैं। इसके लिए किसानों और आम जनता को एकजुट होकर सरकार पर दबाव बनाना होगा।भरतकुमार सोलंकी ने कहा कि यदि अरावली में पांच नए बांधों का निर्माण होता हैं, तो पूरे मारवाड़ का परिदृश्य बदल सकता है। खेतों में चौबीस घंटे पानी उपलब्ध होने से फसल उत्पादन में वृद्धि होगी, किसानों की आय दोगुनी हो सकती हैं और मारवाड़ क्षेत्र आर्थिक विकास में एक मिसाल बन सकता है। उन्होंने आंदोलनरत किसानों से अपील की कि वे अपनी मांगों को व्यापक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करें।

सोलंकी का मानना हैं कि जवाई बांध पर झगड़ने के बजाय नई जल संरचनाओं की मांग करना अधिक व्यावहारिक और स्थायी समाधान होगा। उनका कहना हैं कि यह समय हैं कि सरकार को किसानों की जरूरतों को समझते हुए जल प्रबंधन में सुधार की दिशा में कदम उठाने चाहिए। मारवाड़ क्षेत्र के विकास और यहां के किसानों के भविष्य के लिए यह आंदोलन एक बड़े बदलाव की नींव बन सकता हैं।

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