सतीश सोनी/मुंबई वार्ता
मीरा-भायंदरमीरा-भायंदर में कचरा प्रबंधन को नई दिशा देने के लिए मेकिंग द डिफरेंस ने जीआईसी आरए के सहयोग से एक व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस पहल के तहत वॉर्ड १०, ११ और १२ को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया है, जहां १०० प्रतिशत स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण सुनिश्चित किया जाएगा।
इस अभियान में नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक बनाने और जिम्मेदारी से कचरा निपटान के लिए प्रेरित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इनमें स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान, हाउसिंग सोसाइटियों में घर-घर संपर्क अभियान और सामूहिक जागरूकता कार्यक्रम शामिल है।
सार्वजनिक स्थानों पर ३० स्टील की ट्विन डस्टबिन की स्थापना और २,५०० ड्यूल डस्टबिन घरों में वितरित किया गया, ताकि गीले और सूखे कचरे का सही तरह से पृथक्करण हो सके।इसके अलावा, हाउसिंग सोसाइटियों में २५ गीले कचरे के टंबलर की स्थापना की जाएगी, जिससे जैविक कचरे को खाद में बदला जा सके। घर-घर से सूखा कचरा एकत्र करने के लिए एक इलेक्ट्रिक टेंपो की व्यवस्था की गई है, जिससे प्रभावी पुनर्चक्रण सुनिश्चित होगा। स्वच्छता मेकिंग द डिफरेंस और जीआईसी-आरए का १०० प्रतिशत कचराके प्रति नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने के पृथक्करण मिशन लिए एक भव्य स्वच्छता रैली भी आयोजित की गई।
मेकिंग द डिफरेंस के संस्थापक दीपक विश्वकर्माने इस पहल पर जोर देते हुए कहा कि सही कचरा पृथक्करण एक स्वच्छ और सतत भविष्य की ओर पहला कदम है। हमारा उद्देश्य सिर्फ जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक व्यवहार में परिवर्तन लाना है। जी आईसी-आरए के सहयोग से यह अभियान सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक नागरिक कचरा प्रबंधन में अपनी भूमिका निभाएं। इस परियोजना का आधिकारिक उद्घाटन मेकिंग द डिफरेंस के कार्यालय में हुआ, जहां मनपा अधिकारी, प्रमुख हितधारक और समुदाय के सदस्य एकजुट हुए।
यह अभियान मेकिंग द डिफरेंस के पूर्व सफल प्रयासों, जैसे कि ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान की निरंतरता में एक और महत्वपूर्ण कदम है।मेकिंग द डिफरेंस सतत शहरी विकास के लिए प्रतिबद्ध है और निवासियों, व्यापारियों एवं स्थानीय प्रशासन से इस मिशन में सक्रिय भागीदारी की अपील करता है, ताकि मीरा-भायंदर को स्वच्छता और कचरा प्रबंधन का एक आदर्श शहर बनाया जा सके।


