● 7 मार्च से पूर्णिमा तक होलाष्टक,
● 14 मार्च को मीन की संक्रांति
● 39 दिनों तक नहीं बजेगी शहनाई, नहीं होगा कोई मांगलिक कार्य
वरिष्ठ संवाददाता /मुंबई वार्ता
प्रत्येक वर्ष होलिका दहन से आठ दिन पूर्व फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक प्रारंभ होता है जो पूर्णिमा तक रहता है। इस दौरान सभी शुभ कार्य वर्जित रहते हैं। रंगो के त्योहार होली के दिन सूर्य की मीन संक्रांति से ही खरमास की शुरुआत होती है जो चैत्र अमावस्या तक रहती है। हालांकि चैत्र (वासंतिक) नवरात्र से शक्ति उपासना का पर्व शुरू हो जाता है लेकिन इस बीच मीन संक्रांति के चलते खरमास जारी रहता है।
प्रत्येक वर्ष होलाष्टक से लेकर खरमास तक सभी शुभ कार्य वर्जित रहते हैं। चूंकि इस वर्ष होली 14 मार्च को मनाई जाएगी इसलिए 7 मार्च से होलाष्टक शुरू हो जाएगा जो फाल्गुन 14 मार्च तक रहेगा। पंचांग के अनुसार 14 मार्च को सूर्यदेव भी मीन राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। इसके साथ खरमास (मीनार्क) लग रहा है। इस तरह 7 मार्च से 14 अप्रैल तक कोई भी शुभ मुहूर्त नहीं हैं।
ज्योतिषाचार्य डॉ. पं. अशोक मिश्र ने बताया कि फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि, 7 मार्च से होलाष्टक की शुरुआत हो रही है जो फाल्गुन पूर्णिमा तक रहेगा। इसके बाद 14 मार्च को सूर्यदेव कुंभ राशि से निकल कर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। मीन की इस संक्रांति से खरमास की शुरुआत हो जाएगी जो 14 अप्रैल रहेगी। इस तरह 7 मार्च से 14 अप्रैल, 39 दिनों तक सभी मांगलिक कार्य बंद रहेंगे। इस अवधि में न तो शहनाई बजेगी और न ही कोई अन्य मांगलिक अनुष्ठान किए जा सकेंगे।
पौराणिक कथा के अनुसार होलाष्टक के आठ दिनों में हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को भगवान विष्णु की भक्ति से विमुख करने के लिए कठोर यातनाएं दी थी, इसलिए यह समय नकारात्मक ऊर्जा से भरा माना जाता है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से होलाष्टक के दौरान आठ ग्रह उग्र अवस्था में होते हैं जिससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। सूर्य की मीन संक्रांतिवर्तमान समय में सूर्य देव कुंभ राशि में विराजमान हैं। इस राशि में सूर्य देव 14 मार्च तक रहेंगे। 14 मार्च को सूर्य देव मीन राशि में शाम को 6:32 बजे मीन राशि में गोचर करेंगे। मीन राशि में एक महीने तक रहने के बाद मीन राशि से निकलकर मेष राशि में गोचर कर जाएंगे। मीन संक्रांति के दिन 14 मार्च को पुण्य काल दोपहर 12:39 बजे से शाम 6:29 बजे तक है। महा पुण्य काल शाम 4:29 बजे से शाम 6:29 बजे तक है।
मांगलिक कार्यों पर रोक का वैज्ञानिक कारण पं. अशोक मिश्र के अनुसार होलाष्टक और खरमास के दौरान मांगलिक कार्य वर्जित रहने के पीछे शास्त्रोक्त तथा वैज्ञानिक कारण हैं। इस काल को सूतक काल माना जाता है, क्योंकि इस समय ग्रह उग्र रहते हैं इसलिए मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। 14 मार्च से 13 अप्रैल तक विवाह, मुंडन, नामकरण व कर्णवेध जैसे संस्कार के साथ बेटी और बहन की विदाई नहीं की जाती है। इसे भी शुभ कार्य माना जाता है। खरमास और होलाष्टक में सोना -चांदी जैसी धातु की खरीदारी नहीं करनी चाहिए। इस समय में हवन और यज्ञ करने की भी मनाही होती है।


