मुंबई वार्ता/हरीशचंद्र पाठक

सोमवार 24 मार्च को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सफाई कामगारों द्वारा मुम्बई के आजाद मैदान में अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोविंद भाई परमार के नेतृत्व में आक्रोश मोर्चा निकालने की तैयारी की गई थी लेकिन प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय विभाग और पुलिस की मध्यस्थता से संतुष्ट सफाई कामगारों ने अपना मोर्चा वापस ले लिया।
बता दें कि सफाई कामगारों की निम्न मांगे हैं जिसमें प्रमुख रूप से 225 वर्ग फीट का मकान देने के लिए जारी परिपत्र तत्काल निरस्त किया जाए और 450 वर्ग फीट का मकान मुफ्त में दिया जाए इसके अलावा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1995 में तथा महाराष्ट्र सरकार द्वारा 1998 से 1999 तक विधान सभा में पारित आदेशों के अनुसार सफाई कार्य एक आवश्यक सेवा होने के कारण उक्त सफाई कार्य में ठेकेदारी प्रथा बंद की जाये।
इसके साथ ही मनपा अस्पताल एवं अन्य सरकारी विभागों में सफाई कर्मचारियों की भर्ती की जाये।सफाईकर्मियों के जाति प्रमाण पत्र के लिए 9 सितम्बर 2004 के शासन निर्णय के अनुसार 1960 के निवास प्रमाण पत्र के आधार पर जाति प्रमाण पत्र जारी करने के शासनादेश को तत्काल हटाया जाये।मनपा द्वारा वर्ष 1992 से वर्ष 2007 तक दैनिक वेतन पर 240 दिन पूरे कर चुके सफाई कर्मचारियों को उनका बकाया व अन्य लाभ दिया जाए।
हाउसिंग सोसायटी/निजी भवनों और कारखानों में काम करने वाले असंगठित सफाई कर्मचारियों के लिए महर्षि वाल्मिकी सुदर्शन सफाई कामगार असंगठित कल्याण बोर्ड के गठन की मांग की गई है।इस बारे में प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय विभाग से संतोषजनक चर्चा हुई। और उनके आश्वासन पर 24 मार्च को आयोजित किए गए मोर्चे को रद्द किया गया।
इस दौरान आज़ाद मैदान के सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एवं प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय विभाग के अलावा मकवाना, रवि गवली, राजेशभाई टाकेकर, रघुनाथ जाधव, एस लीना डिसूजा, सुनील पवार और रितिक कांबले मौजूद थे।


