82 साल बाद अक्षय तृतीया पर तीन अद्भुत संयोग।

Date:

● सर्वार्थ सिद्धि योग, शोभन और रवि योग का योग

● तीन गुना अक्षय फल प्रदान करती है’आखा तीज’

● 29 अप्रैल को मनेगी भगवान परशुराम की जयंती

मुंबई वार्ता/वरिष्ठ संवाददाता

सनातन संस्कृति में वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया (आखा तीज) के रूप में मनाया जाता है। अक्षय अर्थात जिसका कभी क्षय न हो अथवा जो कभी खत्म न हो। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन किए गए शुभ कार्य अथवा खरीदी गई संपत्ति तीन गुना शुभता प्रदान करती है। इस वर्ष अक्षय तृतीया बुधवार 30 अप्रैल को तीन शुभ संयोगों में मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार यह अद्भुत संयोग 82 साल बाद बन रहा है।

ज्योतिषाचार्य डॉ. अशोक मिश्र ने बताया कि इस दिन दान, तप और साधना करने से उसका पुण्य अनंत काल तक खत्म नहीं होता है। यही नहीं अक्षय तृतीया पर बिना मुहूर्त विचार किए कोई भी शुभ काम किया जा सकता है। इस दिन बिना किसी मुहूर्त के शादी, गृह प्रवेश, मुंडन आदि मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। अक्षय तृतीया पर ही श्री हरि विष्णु के छठवें अवतार भगवान परशुराम का जन्म माता रेणुका और ऋषि जमदग्नि के घर प्रदोष काल में हुआ था। उन्हें चिरंजीवी माना जाता है, अर्थात वे आज भी धरती पर विद्यमान हैं।

हर वर्ष वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर प्रदोष काल में अक्षय तृतीया के साथ भगवान परशुराम की जयंती मनाई जाती है। चूंकि इस वर्ष तृतीया तिथि 29 अप्रैल को शाम 5:32 बजे शुरू होगी और इसी दिन प्रदोष काल मिलेगा इसलिए अक्षय तृतीया के मुहूर्त काल में भगवान परशुराम की जयंती मंगलवार 29 अप्रैल को मनाई जाएगी। अक्षय तृतीया का गोचर काल पंचांग के अनुसार वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि मंगलवार 29 अप्रैल को शाम 5:32 बजे से प्रारंभ होगी। इसका समापन 30 अप्रैल की दोपहर 2:25 बजे होगा। उदया तिथि की गणना के अनुसार बुधवार 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया मनाई जाएगी।

इस साल अक्षय तृतीया पर सर्वार्थ सिद्धि योग, शोभन योग और रवि योग बन रहे हैं। ये तीनों ही अद्भुत योग हैं। मान्यता है कि सर्वार्थ सिद्धि योग में जो भी काम किया जाता है, वह सिद्ध होता है।शोभन योग शुभता का संकेत देता है जबकि रवि योग काम में सफलता दिलाता है। इन योगों में संपत्ति क्रय के साथ पूजा, जप, तप और दान करके अक्षय फल प्राप्त किया जा सकता है। सर्वार्थ सिद्धि योग में पूजा से सिद्धियों की प्राप्ति होती है।

30 अप्रैल को दोपहर 12:02 बजे से शोभन योग शुरू हो रहा है। शाम को 4:16 बजे से रवि योग भी प्रारंभ रहा है। त्रिपुष्कर योग में परशुराम जयंती मंगलवार 29 अप्रैल को परशुराम जयंती पर सौभाग्य का योग दोपहर बाद 3:54 बजे तक है। साथ ही इस दिन त्रिपुष्कर योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। इन योगों में भगवान परशुराम की पूजा करने से देवी लक्ष्मी की कृपा बरसेगी। मुंबई में जगह जगह आस्था और उल्लास के साथ परशुराम जयंती मनाई जाएगी। कहीं कहीं शोभायात्रा निकाली जाएगी।

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