ऑपरेशन सिंदूर; बाहरी संकट ध्वस्त, मगर आंतरिक चुनौती ?

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ज्ञानेंद्र मिश्र/मुंबई वार्ता/स्तंभकार

■ ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और चुनौतियां

ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में जो भी जानकारियां अब तक बाहर निकल कर आ रही हैं, उसने यह तो तय कर दिया कि पाकिस्तान अगले दशक तक अपने पांव पर खड़ा न हो सकेगा। मगर कहते हैं न कि कुत्ते की पूंछ को अगर 10 साल भी नली में रखो तो भी सीधी नहीं होती।सनद रहे की पाकिस्तानियों के सबसे बड़े हथियार पाकिस्तान में नहीं वरन् भारत में बसे वो स्लीपर सेल्स हैं, जिन्होंने भारतीय खुफिया तंत्र को धता बताते हुए पहलगाम में भारत-पाकिस्तान सीमा से 200 किलोमीटर अंदर तक जाकर हिंदू-नरसंहार जैसे जघन्य वारदात को सफलतापूर्वक कार्यान्वित किया।

■ आंतरिक चुनौतियों का सामना

आवश्यकता है कि सतर्क हों हम- क्योंकि यदि वाकई में जिस प्रकार पहलगाम के जघन्य नरसंहार के बाद कश्मीर समेत पूरे भारत में मुसलमानों ने और उनके आकाओं ने अर्थात् विपक्षी राजनीतिक दलों ने एक साथ अपना समर्थन भारतीय सरकार को जताया है, यह वास्तव में है तो काबिले तारीफ, मगर इन सभी के इतिहास को देखते हुए यह तो निश्चित है कि ये भरोसे के लायक नहीं हैं।

■ मुस्लिम समुदाय और विपक्षी दलों की भूमिका

जहां तक मेरा विश्लेषण है कि मुसलमान और उनके आकाओ, विपक्षी राजनैतिक दलों द्वारा आतंक का विरोध, यह हिंदू मेजॉरिटी के साथ खड़े होने का दिखावा, ये वर्तमान सरकार के साथ पूर्ण सहयोग का भरोसा- मात्र सतही दिखावा है। इन सबके क्रोध का कारण यह आतंकवादी घटना नहीं वरन् जिस गैर जिम्मेदारी से हिंदू नरसंहार की घटना घटी, उस पर है अर्थात् आतंकवादियों ने जो आतंक का धर्म तय कर दिया, उसने इन सभी को नग्न कर दिया- सो इस पर‌तो क्रोधित होना तो बनता ही है- अब किस मुंह से आतंक का बचाव करते कि आतंक का धर्म नहीं होता और यह सभी भूले-भटके नौजवान हैं। आतंक के धर्म के साथ खड़े होकर यह भारत में- जहां हिंदू बहुसंख्यक है- अपने अस्तित्व को लेकर के जोखिम नहीं ले सकते हैं।

■ कश्मीर की स्थिति और हिंदू पर्यटकों की भूमिका

साथ ही कश्मीर में सालाना अगर ढाई करोड़ हिंदू पर्यटक जाते हैं तो वहां की रोजी-रोटी के लिए यही हिंदू पर्यटक जिम्मेदार हैं और अगर यह हिंदू पर्यटक ही जाना बंद कर दें तो यह सब भूखे पेट ही बिलख बिलख कर मर जाएंगे। और कश्मीरियों को इस ख्याल ने, उनकी रातों की नींद उड़ा दी जिससे घबराकर वह सभी के सभी आज आतंक के खिलाफ दिखाई दे रहे हैं।

■ दो प्रमुख कारण

यदि आप अपने विवेक का इस्तेमाल करें तो समझ सकेंगे कि केवल मुख्यतः दो कारण हैं जिसके वजह से कश्मीरी, भारतीय मुसलमान और इनके सरपरस्त भारतीय राजनीतिक विपक्षी दल- क्यों भारत सरकार के साथ आतंक के विरोध में पाकिस्तान के विरोध में भारत सरकार के साथ मुखर रूप से दिखाई दिए;*१)

पहला कारण तो यह कि इस हिंदू नरसंहार ने आतंक का धर्म तय कर दिया- तो कश्मीर के मुसलमानों और भारत के अधिकतम मुसलमान को तथा उनके राजनीतिक सामाजिक आकाओं को इस बात की कोफ्त, इस बात के लिए क्रोध है कि- “हमको नग्न क्यों कर दिया तुमने दुनिया के सामने?”**२) और दूसरा कारण व्यवसायिक- कश्मीर को भूखा मरने से बचाने के लिए भारतीय हिंदुओं को रिझाना और यह जताना कि हम इस आतंकी नरसंहार, हिंदू नरसंहार के हिस्सा नहीं हैं – जबकि इन्हीं कश्मीरियों ने पिछले 6 महीने या 1 वर्ष से इन आतंकवादियों को अपने घरों में शरण दी- सैकड़ो रातें इन आतंकवादियों ने इनके घर में बिताए, इनके साथ भोजन किया, इन्हीं कश्मीरियों ने इन आतंकवादियों को खुफिया सूचनाओं मुहैया कराई, इन आतंकियों के लिए हिंदू शिकार को चिन्हित किया है इन्हीं कश्मीरियों ने- इस बात को भूलने की या नजरअंदाज करने की आवश्यकता कत्तई नहीं है।

■ आगे की कार्रवाई-

ऑपरेशन सिंदूर के अंतर्गत भारत सरकार ने त्वरित कार्रवाई के तहत आतंक के जननी कहे जाने वाले राष्ट्र पाकिस्तान पर आक्रमण कर उनकी क्षमताओं को नेस्तनाबूद तो किया- पर क्या यह पर्याप्त है?_नहीं, कत्तई नहीं! जब आप जानते हैं कि आपके घर में सांप है और बाहर के बगीचे में सांप के बिल हैं, तो आपके लिए विडंबना होती है की करना क्या चाहिए पहले?? पहले उपचार तो यह हो कि अपने घर में रह रहे सदस्यों को तुरंत घर में घुसे सांपों से बचाए अर्थात घर के अंदर के सांप को तुरंत मर जाए खत्म किया जाए ताकि आपके घर के सदस्य सुरक्षित रह सके जीवित रह सकें। मगर समानांतर ही आपको अपने घर के बाहर के बगीचे में जो सांप के बिल हैं, उनको नेस्तनाबूत करना होगा।

■ आगे की रणनीति

यहां अआपने अपने घर के बाहर बगीचे(अर्थात् पाकिस्तान) में सांप के बिलों को ध्वस्त किया है और बहुत संभव है कि साल- 6 महीने तक ये सांप या इनके सपोले तैयार ना हो सकेंगे, संभवतः आपके घर में न घुस सकेंगे। मगर आपको ध्यान रखना होगा कि आपके घर में अभी भी, सभी के सभी सांप मौजूद हैं, उन सभी को चिंन्हित कर ढूंढ-ढूंढ कर खत्म करना होगा अर्थात् पूरे भारत में- न ही सिर्फ पाकिस्तानी बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं को चिन्हित कर खत्म करना होगा- जो की बहुत आसान काम है शासन के लिए- बल्कि छद्मावरण धारण किए पाकिस्तानी, बांग्लादेशी सपोलों को दूध पिलाने वाले, हर ढंग से उनकी मदद करने वाले-चाहे कूटनीति के माध्यम से या राजनीति के माध्यम से या ज्यूडिशल एक्टिविज्म के माध्यम से, ह्यूमन राइट्स मानव अधिकार के छद्मावरण में- किसी भी रूप में हमारे आपके बीच मौजूद हैं, तो उन्हें बगैर किसी लाग लपेट के पहचानिए और इन विदेशी सपोलों के साथ खत्म कर दीजिए।

■ अंतरराष्ट्रीय दबाव की चिंता न करें

आपको अंतरराष्ट्रीय दबाव और मानव अधिकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है- आपको अपने पड़ोसी राष्ट्र श्रीलंका तथा अपने मित्र राष्ट्र इजराइल से सबक लेने की आवश्यकता है- श्रीलंका ने शत्रु विनाश इतनी द्रुत गति से किया कि खबर जब तक बाहर जाती और अंतरराष्ट्रीय दबाव इसके पहले की श्रीलंका तक पहुंचता, कार्यवाही पूरी हो चुकी थी। और इजराइल से – चुन चुन कर शत्रु नाश की विधा को, इसराइल के रौद्र रूप को धारण कर, स्वयं पर भरोसा रख यह समझते हुए की इस राष्ट्र का हर नागरिक, जो हिंदू हित और हिंदू हित में निहित राष्ट्र हित पर भरोसा रखता है, आपके साथ खड़ा है- आइए , निकलिए, देखिए- इस राष्ट्र का हर एक राष्ट्र प्रेमी नागरिक आपके बगल खड़ा दिखाई देगा और लोकतांत्रिक व्यवस्था में सबसे बड़ी शक्ति जन शक्ति होती है अतः इस जनशक्ति को अपना बल बनाकर त्वरित कार्रवाई कीजिए-

■ निष्कर्ष

विश्वास करिए यह राष्ट्र सदैव, सदैव के लिए आपका ऋणी रहेगा। अन्यथा ऑपरेशन सिंदूर, यकीन मानिए- आपके अंतिम लक्ष्य- सतत् शांति व राष्ट्र निर्माण- का मात्र 10% सफल हुआ, ही साबित होगा।

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