■”मानव संसाधन विकास ही असली निवेश है” – मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस.
■ “राष्ट्रीय शिक्षा नीति देश के वैचारिक पुनर्जागरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम” – केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान.
मुंबई वार्ता संवाददाता

आज के दौर में धन नहीं, बल्कि मानव संसाधन ही असली पूंजी है। उद्योग वहीं जाते हैं जहाँ प्रशिक्षित श्रमिक, शोध और नवाचार होता है। इसलिए गुणवत्तापूर्ण और विविध कौशल से युक्त कार्यबल तैयार करना अत्यंत आवश्यक है। इसी कारण मानव संसाधन विकास ही असली और दीर्घकालिक निवेश है, ऐसा प्रतिपादन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया। वह विले पार्ले स्थित श्री विले पार्ले शिक्षण मंडल (SVKM) की मुकेश पटेल स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एंड इंजीनियरिंग और नरसी मोनजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ की नई इमारतों के उद्घाटन एवं नए शैक्षणिक संकुल के भूमिपूजन समारोह में बोल रहे थे।
इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, एनएमआईएमएस विश्वविद्यालय के कुलपति अमरीशभाई पटेल, एसवीकेएम के सह-अध्यक्ष भूपेशभाई पटेल, विधायक पराग आळवणी, अमित साटम, पूर्व विधायक कृपाशंकर सिंह, भरत सांगवी, जयंत गांधी, शिक्षकगण और विद्यार्थी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री फडणवीस ने कहा कि एनएमआईएमएस जैसी संस्थाओं ने शिक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शी प्रवेश प्रक्रिया और वैश्विक स्तर की शिक्षा देकर देश में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। केंद्र सरकार के सहयोग से नवी मुंबई में 250 एकड़ भूमि पर ‘एज्यूसिटी’ (EduCity) की संकल्पना पर काम शुरू हो गया है। यहां एबरडीन विश्वविद्यालय, यॉर्क विश्वविद्यालय, वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय, इलिनॉय इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, और इंस्टिट्यूटो यूरोपियो डी डिझाईन जैसे शीर्ष अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों की शाखाएं खुलेंगी।
इससे वैश्विक ज्ञान भारत में आएगा, शिक्षा का खर्च घटेगा और विद्यार्थियों को विदेश जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि पहले शिक्षा पद्धति जटिल और धीमी थी – पाठ्यक्रम में बदलाव में सालों लग जाते थे। लेकिन अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के माध्यम से लचीलापन और गति आई है। महाराष्ट्र और मुंबई आज स्टार्टअप हब बन चुके हैं। राज्य सरकार ने एक स्टार्टअप फंड की भी स्थापना की है जिससे नवउद्यमियों को सहायता मिल रही है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि शिक्षा संस्थानों की इमारतों की ऊंचाई सीमा बढ़ाने के लिए एक समिति गठित की गई है। समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। साथ ही विद्यार्थियों और युवाओं के लिए एक विश्व स्तरीय स्टेडियम के लिए ज़मीन उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
■ “राष्ट्रीय शिक्षा नीति – भारत के वैचारिक पुनर्जागरण का आधार” – केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता केवल ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध संघर्ष नहीं थी, बल्कि शिक्षा के माध्यम से भारतीय मूल्यों का पुनर्संचार करने की भी लड़ाई थी। ब्रिटिशों द्वारा लागू की गई मैकॉले शिक्षा प्रणाली ने हमारी पारंपरिक ज्ञान व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया और हमें गुलाम मानसिकता की ओर धकेला।राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, भारत के वैचारिक और मानसिक पुनरुत्थान की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। इसकी प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सभी स्तरों पर प्रयास होने चाहिए।
श्री. प्रधान ने नरसी मोनजी जैसे संस्थानों की सराहना करते हुए कहा कि ये केवल शैक्षणिक संस्थाएं नहीं, बल्कि नवभारत के निर्माण की प्रेरणा हैं। एसवीकेएम ने कॉमर्स, ट्रेडिंग और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का काम किया है। छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “आप केवल विद्यार्थी नहीं हैं, बल्कि नवभारत के सेनानी हैं। विकसित भारत की रचना में आपका योगदान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।”विद्यार्थियों से संवादमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मुकेश पटेल स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एंड इंजीनियरिंग तथा नरसी मोनजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ की नई इमारतों का निरीक्षण किया।
उन्होंने ऑटोमेशन लैब, मैन्युफैक्चरिंग लैब में विद्यार्थियों द्वारा किए जा रहे नवाचारों की जानकारी ली। इसके अलावा उन्होंने प्रो. वाय. के. भूषण इन्फॉर्मेशन अँड नॉलेज रिसोर्स सेंटर, डिजिटल और फाइनान्स लैब तथा लाइब्रेरी का अवलोकन किया और छात्रों से संवाद भी किया।


