■ गुजरात में पहली कक्षा से हिंदी अनिवार्य नहीं, तो फिर सिर्फ महाराष्ट्र में ही क्यों?
मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र में पहली कक्षा से हिंदी को अनिवार्य बनाने की जिद देवेंद्र फडणवीस की है। हमें हिंदी या किसी भी भाषा से विरोध नहीं है, लेकिन प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में होनी चाहिए, यह बात सभी शिक्षाविदों का मत है। परंतु भाजपा को तो हिंदी की अनिवार्यता थोपकर मराठी भाषा और संस्कृति को खत्म करना है। यह भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सुनियोजित षड्यंत्र है और उसपे अंमल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कर रहे हैं।


इस हिंदी थोपने के फैसले का कांग्रेस पुरजोर विरोध करती है और किसी भी कीमत पर महाराष्ट्र में हिंदी की अनिवार्यता लागू नहीं होने देगी, ऐसा इशारा महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने दिया।
तिलक भवन में आयोजित पत्रकार परिषद में बोलते हुए सपकाल ने कहा कि इससे पहले भी जब हिंदी अनिवार्यता का शासनादेश आया था, तब कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया था और आदेश वापस लेने की मांग की थी। तब सरकार ने कहा था कि हिंदी थोपने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन अब 17 जून 2025 को जो शासनादेश जारी हुआ है, उसमें केवल शब्दों का फेरबदल कर के हिंदी की अनिवार्यता बरकरार रखी गई है। यह फडणवीस की चालाकी है, जो अब जनता की समझ में आ चुकी है।
शब्दों को बदल देने से अर्थ नहीं बदलते। मराठी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति है, और इस संस्कृति को खत्म करने का भाजपा और संघ का अजेंडा है।“हिंदी, हिंदू और हिंदू राष्ट्र” — यह विचार संघ प्रचारक गोवलकर की “बंच ऑफ थॉट्स” में है। यही एजेंडा आज फडणवीस महाराष्ट्र में लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन हम इस षड्यंत्र को ध्वस्त कर देंगे, ऐसा सपकाल ने स्पष्ट किया।
अगर भाजपा शासित गुजरात में पहली कक्षा से हिंदी अनिवार्य नहीं है, तो महाराष्ट्र में ही यह ज़बरदस्ती क्यों? गुजरात में हिंदी अनिवार्यता क्यों नहीं, यह सवाल देवेंद्र फडणवीस को नरेंद्र मोदी से पूछना चाहिए। छत्रपती शिवाजी महाराज के हिंदवी स्वराज्य की भूमि पर भाजपा का “हिंदू राष्ट्र” थोपने का प्रयास सफल नहीं होने दिया जाएगा। यह लड़ाई हिंदवी स्वराज्य बनाम हिंदू राष्ट्र की है – और कांग्रेस शिवाजी महाराज के स्वराज्य के साथ खड़ी है।अब वक्त आ गया है कि जनता इस हिंदी थोपने के आदेश का पूर्णतः बहिष्कार करे और उसका कडलोट (समूल नाश) करे!
■ अब भाजपा में सिर्फ दाऊद इब्राहिम की एंट्री बाकी है…
नाशिक के सुधाकर बडगुजर के संबंध कुख्यात माफिया दाऊद इब्राहिम के गुर्गे सलीम कुत्ता से हैं। इसकी जांच के लिए खुद फडणवीस ने विधानसभा में एसआइटी जांच की घोषणा की थी। और अब उसी बडगुजर को भाजपा ने गले लगाया और स्वागत किया! पहले इक्बाल मिर्ची से जुड़े नेताओं की पार्टी को सत्ता में शामिल किया मिर्ची को मीठा बना दिया। और अब कुत्ते से सांठगांठ कर ली। अब तो बस दाऊद इब्राहिम को भाजपा में प्रवेश देना ही बाकी रह गया है, ऐसा तीखा तंज हर्षवर्धन सपकाल ने कसा।


