मुंबई वार्ता संवाददाता

उपनगरीय रेलवे पर यात्रियों के तनाव को कम करने के लिए, मुंबई शहर और मुंबई उपनगरीय जिलों में राज्य सरकार के अधीन सरकारी और अर्ध-सरकारी कार्यालयों के कार्यालय समय को अलग करने के लिए कदम उठाए गए हैं। तदनुसार, इस नीति की व्यवहार्यता की जाँच करने और सरकार को सिफारिशें करने के लिए मुख्य सचिव राजेश कुमार की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है।
बढ़ते शहरीकरण के कारण, मुंबई में उपनगरीय रेलवे यात्रियों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। इसके कारण, ट्रेन पकड़ते या उसमें लटकते हुए यात्रा करने वाले यात्रियों की आकस्मिक मौतों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। तीन वर्षों में, उपनगरीय रेलवे पर विभिन्न दुर्घटनाओं में ७,५६५ यात्रियों की मृत्यु हुई। जबकि पिछले वर्ष ठाणे और कल्याण के बीच 7७४१ यात्रियों ने अपनी जान गंवाई।
कुछ दिन पहले, मुंब्रा में एक रेल दुर्घटना में पाँच यात्रियों की मृत्यु हो गई और नौ यात्री घायल हो गए। उपनगरीय रेल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर विपक्ष ने विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार को आड़े हाथों लिया था। उस समय सरकार ने केंद्रीय रेल मंत्री के साथ बैठक कर यात्रियों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने का आश्वासन दिया था। रेल प्रशासन ने मुंबई उपनगरीय रेल ट्रेनों में सुबह और शाम यात्रियों की भीड़ कम करने के लिए मुंबई स्थित केंद्र सरकार, राज्य सरकार और निजी संस्थानों के कार्यालयों के लिए अलग-अलग कार्यालय समय रखने का अनुरोध किया है।
इसी के तहत, मुंबई शहर और मुंबई उपनगरीय जिलों में राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सरकारी कार्यालयों के लिए अलग-अलग कार्यालय समय रखने का प्रयास किया गया है। इस प्रस्ताव की व्यवहार्यता की जाँच के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है।
इस समिति में वित्त, परिवहन, नगरीय विकास, सामान्य प्रशासन (सेवाएँ), उद्योग, निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के सचिव श्रीकर परदेशी, परिवहन आयुक्त और मुंबई के दोनों जिला कलेक्टर सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं। समिति को कर्मचारी संघों के साथ चर्चा कर तीन महीने के भीतर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। सूत्रों ने बताया कि यदि राज्य सरकार का यह प्रयोग सफल रहा, तो केंद्रीय और निजी कार्यालयों के समय में भी बदलाव किया जाएगा।



इससे शहर में बढ़ रहे दबाव में कमी आएगी