● अगर मंत्री ही कह रहे हैं कि ‘सरकार भिखारी है’, तो यह असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा है; महाराष्ट्र की छवि को कलंकित मत कीजिए।
मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र को एक समृद्ध राजनीतिक परंपरा और संस्कृति प्राप्त है, लेकिन उसी को मिट्टी में मिलाने का बीड़ा क्या देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने उठाया है? ऐसा सवाल उठता है। फडणवीस के मंत्रिमंडल में एक से बढ़कर एक “नगीने” हैं, जैसे माणिक और मोती। महाराष्ट्र के कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे ने तो हद ही पार कर दी है। अब उन्होंने यह कहकर कि “सरकार भिखारी है”, असंवेदनशीलता की सारी सीमाएँ लांघ दी हैं। ऐसे मंत्री को एक मिनट भी पद पर रखने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन मुख्यमंत्री उन्हें क्यों बचा रहे हैं? क्या देवेंद्र फडणवीस में कोकाटे को बर्खास्त करने की हिम्मत नहीं है? ऐसा सवाल महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने उठाया है।


कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे के संदर्भ में बोलते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आगे कहा कि, कोकाटे का विधानसभा में ऑनलाइन रम्मी खेलते हुए वीडियो न केवल मीडिया में, बल्कि सोशल मीडिया पर भी सभी ने देखा है। किसान संकट में है, बेमौसम बारिश से नुकसान हुआ है जिसकी भरपाई अब तक नहीं दी गई है। कृषि उत्पादों को उचित मूल्य नहीं मिल रहा, कर्जमाफी का वादा करके भी सरकार ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है। राज्य के कुछ हिस्सों में दोबारा बुआई का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में जब किसान इतने गंभीर संकटों का सामना कर रहा है, तो कोकाटे की कार्यशैली और बयान यह दर्शाते हैं कि उन्हें इन समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है।


“मैंने किसानों को भिखारी नहीं कहा, बल्कि सरकार को भिखारी कहा” और “क्या इस्तीफा देना कोई अश्लील हरकत है?” – ऐसे बेहूदा बयान देकर कोकाटे यह जताने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया। यह घोर बेशर्मी है, और इससे भी ज्यादा चिंताजनक यह है कि मुख्यमंत्री फडणवीस भी उन्हें गंभीरता से नहीं ले रहे। ऐसे उद्दंड मंत्री को तुरंत मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए, लेकिन जब ऐसा नहीं हो रहा है तो लगता है कि फडणवीस किसी मजबूरी में हैं, जिस कारण वे कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं दिखा पा रहे। वजह चाहे जो भी हो, ऐसे व्यक्ति से महाराष्ट्र की छवि को नुकसान हो रहा है – इसकी चिंता तो कीजिए, ऐसा सपकाल ने कहा।
सपकाल ने आगे कहा कि माणिकराव कोकाटे लगातार विवादित बयान देकर मंत्री पद की गरिमा को ठेस पहुँचा रहे हैं। ऐसे व्यक्ति का मंत्री बने रहना न तो राज्य के लिए हितकर है और न ही किसानों के लिए।
महाराष्ट्र में किसान आत्महत्याओं की दर चिंताजनक है, और यह राज्य के लिए किसी भी तरह से गौरव का विषय नहीं है। इसलिए कोकाटे को तत्काल पद से हटाकर “नारियल देकर” घर भेज देना चाहिए, ऐसा भी कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने स्पष्ट किया।


