मुंबई वार्ता संवाददाता

कांग्रेस पार्टी हमेशा आतंकवाद के खिलाफ रही है। महात्मा गांधी, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के बलिदान से कांग्रेस ने आतंकवाद की बहुत बड़ी कीमत चुकाई है। आतंकवाद का कोई धर्म, जाति या रंग नहीं होता, आतंकी सिर्फ आतंकी होता है और उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए, ऐसा स्पष्ट करते हुए कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा है कि जिस प्रकार मुंबई रेलवे धमाके के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा रही है, उसी तरह मालेगांव बम धमाके के फैसले को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी या नहीं, यह सरकार को स्पष्ट करना चाहिए।


मालेगांव बम धमाके के फैसले पर तिलक भवन में पत्रकारों से बात करते हुए हर्षवर्धन सपकाल ने आगे कहा कि 2008 में मालेगांव में हुए बम धमाके में 6 लोगों की मौत हुई थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे, यह एक सच्चाई है। उस समय के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख, गृहमंत्री आर. आर. पाटील और इस मामले की जांच करने वाले अधिकारी हेमंत करकरे ने इस मामले को गंभीरता से आगे बढ़ाया था। आज के दिन उनका स्मरण करना आवश्यक है।


उन्होंने यह भी कहा कि “केंद्र में सत्ता परिवर्तन के बाद मालेगांव बम धमाके के आरोपियों के प्रति नरम रवैया अपनाने को कहा गया था,” यह बात विशेष सरकारी वकील रोहिणी सालियन ने पहले ही उजागर की थी। और आज के फैसले के संदर्भ में यह बात अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
सपकाल ने आगे कहा कि कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है, लेकिन यह बम धमाका किसने किया, यह सवाल अब भी अनुत्तरित है। सरकार की भूमिका आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ और निष्पक्ष होनी चाहिए। यदि रेलवे धमाके के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है, तो मालेगांव बम धमाके के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट का रुख करना होगा। सरकार दोहरा रवैया नहीं अपना सकती।उन्होंने यह भी कहा कि आज जिन आरोपियों को निर्दोष करार दिया गया है, वैसे ही भारत की आजादी के बाद की पहली आतंकवादी घटना महात्मा गांधी की हत्या नाथूराम गोडसे ने की थी। उस मामले में 7 आरोपियों में से 6 को सजा दी गई थी, लेकिन सावरकर को बरी कर दिया गया।
हालांकि, कपूर आयोग की रिपोर्ट में सावरकर पर गंभीर संदेह और आरोप लगाए गए हैं, यह बात भी प्रदेशाध्यक्ष ने दोहराई।


