मुंबई वार्ता संवाददाता

भाजपा हॉकर्स यूनिट के अध्यक्ष और मुंबई के पूर्व उप महापौर बाबूभाई भवानजी ने कहा है कि राहुल गांधी में परिपक्वता की कमी है और वे कांग्रेस पार्टी को ले डूबेंगे। आज एक बयान में भवानजी ने कहा कि राहुल गांधी को अपनी जिम्मेदारियों का जरा भी अहसास नहीं है। वे कुछ भी बोलते रहते हैं। आधारहीर आरोप लगाते रहने के कारण जनता की निगाह से वे गिर चुके हैं। जनता उन्हें गंभीरता से नहीं लेती है।


भवानजी ने कहा कि जितने अपरिपक्व राहुल गांधी उससे ज्यादा अपरिपक्व उनके सलाहकार हैं जो उन्हें हमेशा गलत सलाह देते हैं और मजाक का पात्र बनाते रहते हैं। बता दें कि राहुल गांधी ने डबल वोटिंग को लेकर बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन अब वही उनके गले की फांस बन सकता है. क्योंकि चुनाव आयोग दावा कर रहा कि उन्होंने फर्जी डॉक्यूमेंट दिखाए. ।
गौरतलब है कि कर्नाटक में डबल वोटिंग का दावा अब कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लिए कानूनी पचड़ा बन गया है. राहुल गांधी ने अपनी प्रेजेंटेशन में एक डॉक्यूमेंट दिखाते हुए दावा किया था कि यह चुनाव आयोग का रिकॉर्ड है. शगुन रानी नाम की एक महिला के पास दो-दो वोटर आईडी हैं. इसमें पोलिंग बूथ ऑफिसर का टिक मार्क लगा है, जो यह साबित करता है कि शगुन रानी ने दो बार वोट भी किया. अब यही राहुल गांधी के गले की फांस बन गया है. क्योंकि चुनाव आयोग कह रहा कि पूरी कहानी ही उल्टी है.


कर्नाटक के चीफ इलेक्शन कमीश्नर ने राहुल गांधी को नोटिस जारी कर दिया है और पूछा है कि जो दावा आपने किया, उसका सबूत तो दीजिए. क्योंकि हमने जो जांच की है, उसके मुताबिक- शगुन रानी नाम की महिला ने दो बार वोट नहीं किया. लेकिन सबसे बड़ा सवाल, अगर राहुल गांधी का दावा गलत पाया गया तो क्या होगा? कहा जा रहा है कि उन पर आर्टिकल 337 के तहत कार्रवाई हो सकती है. भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 337 एक गंभीर अपराध में लागू होती है. जब भी कोई शख्स सरकारी दस्तावेज या कोर्ट रिकॉर्ड की जालसाजी करता है तो उस पर ये धारा लगाई जा सकती है. जैसे कोई शख्स अगर वोटर आईडी, आधार कार्ड, जन्म-मृत्यु या विवाह रजिस्टर, सरकारी प्रमाणपत्र, कोर्ट की कार्यवाही के रिकॉर्ड, पावर ऑफ अटॉर्नी जैसे दस्तावेज में खेल करे, तो वो इस खेल में फंस सकता है।
माना जा रहा कि राहुल गांधी ने जिस तरह चुनाव आयोग के डॉक्यूमेंट को गलत तरह से पेश किया, उसमें छेड़छाड़ की गई, वह इस दायरे में आएगी. अगर ऐसा हुआ तो कड़ी कार्रवाई की जा सकती है. कानून कहता है कि अगर कोई व्यक्ति ऐसे किसी डॉक्यूमेंट को जाली साबित करने में दोषी पाया जाता है, चाहे वह डॉक्यूमेंट कागजी हो या इलेक्ट्रॉनिक, तो उसे 7 साल तक की कठोर कारवास की सजा दी जा सकती है. इतना ही नहीं, उस पर असीमित जुर्माना भी लगाया जा सकता है. कानून विशेषज्ञों के मुताबिक, यह अपराध गैर-जमानती भी हो सकता है, यानी दोषी पाए जाने पर गिरफ्तारी के बाद कोर्ट से ही जमानत लेनी होगी.
कानून ये भी कहता है कि अगर आरोप साबित होते हैं तो दोषी व्यक्ति को राजनीति में बने रहने पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 के तहत 2 साल या उससे अधिक की सजा होने पर संसद या विधानसभा की सदस्यता जा सकती है. राहुल गांधी के मामले में अगर जांच और कोर्ट में यह साबित होता है कि उन्होंने वोटर लिस्ट से जुड़ा कोई जाली डॉक्यूमेंट बनाया या इस्तेमाल किया, तो धारा 337 के तहत उन पर केस चल सकता है और दोषी साबित होने पर उन्हें 7 साल तक की जेल, जुर्माना, और सांसद पद गंवाने का खतरा भी हो सकता है।
चुनाव आयोग को कोर्ट में यह तय करना होगा कि डॉक्यूमेंट जानबूझकर जाली बनाया गया या सिर्फ गलती से शामिल हुआ. सबूत की जिम्मेदारी अभियोजन पक्ष पर यानी चुनाव आयोग पर होगी. दोष साबित होने पर सजा और जुर्माने की मात्रा अदालत तय करेगी।


