मुंबई वार्ता संवाददाता

स्वास्थ्य विभाग ने बताया है कि सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक संबंधी निर्णय को कानूनी रूप से मजबूत बनाने में विभाग के विधि सलाहकार एडवोकेट सतीश भेंडेकर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कानूनी पहलुओं की प्रभावी ढंग से पैरवी की, आवश्यक दस्तावेजों की समय पर पूर्ति सुनिश्चित की और पूरे मामले में बेहतर समन्वय स्थापित कर शासन का पक्ष मजबूती से रखा।


स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कानून विशेषज्ञों और स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह फैसला सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। उनका कहना है कि यह निर्णय सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में अनुशासन, जवाबदेही और मरीजों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाला एक ऐतिहासिक निर्णय है।
विभाग ने विश्वास जताया है कि इस फैसले से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा, डॉक्टरों की जवाबदेही बढ़ेगी और मरीजों को अधिक प्रभावी तथा पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।


