पुणे में आरोपी की सरेआम परेड कराना पड़ा भारी, मानवाधिकार आयोग ने मुख्य सचिव समेत 11 पुलिस अधिकारियों को भेजा नोटिस।

Date:

श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

पुणे में एक आरोपी को भीड़भाड़ वाले इलाके में सार्वजनिक रूप से अपमानित करते हुए उठक-बैठक करवाने और उसकी परेड निकालने के मामले में महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव, पुणे के पुलिस आयुक्त समेत 11 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रतिवादी बनाते हुए नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों को 9 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में अपना पक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।


आयोग के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अनंत बदर ने यह निर्देश शिकायतकर्ता स्वप्नील जाधव और तानाजी कारचे की ओर से दायर शिकायत पर सुनवाई के दौरान दिए। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि लक्ष्मीनगर पुलिस थाने के एक आरोपी को हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने उसकी सार्वजनिक रूप से परेड निकाली, अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया, उससे उठक-बैठक करवाई और लोगों के सामने माफी मांगने के लिए मजबूर किया।


आयोग ने प्रथम दृष्टया माना है कि उपलब्ध रिपोर्ट और तस्वीरों से आरोपी के साथ सार्वजनिक स्थान पर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किए जाने के संकेत मिलते हैं। आयोग ने कहा कि संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी पीड़ित के मानवाधिकारों की रक्षा करना थी, लेकिन इसके बजाय उसे सार्वजनिक रूप से दंडित किया गया, जो मानवाधिकारों के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है।


इस मामले में मुख्य सचिव, पुणे पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार, पुलिस उपायुक्त चिलुमुला रजनीकांत, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक रवींद्र कदम, शिवाजी विभुते, रविकांत नंदनवार, महेश नलावड़े सहित पुलिसकर्मी अमोल गायकवाड़, अमोल वायाळ, भीमराव कांबळे, दत्तात्रय शिंदे, कादिर शेख और सूरज अंबासे को प्रतिवादी बनाया गया है।


आयोग ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 18 के तहत कार्रवाई योग्य प्रतीत होता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार का पक्ष स्पष्ट करने के लिए मुख्य सचिव को भी प्रतिवादी बनाया गया है और उन्हें जवाब दाखिल करने की स्वतंत्रता दी गई है।


आयोग के निबंधक न्यायमूर्ति विजय केदार ने बताया कि उपलब्ध तस्वीरों और दस्तावेजों से ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित अधिकारियों ने न केवल मानवाधिकारों की रक्षा करने में लापरवाही बरती, बल्कि कथित रूप से उनके उल्लंघन में भी सहभागिता रही। अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को होगी, जिसमें सभी प्रतिवादियों को अपना पक्ष रखना होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

प्रमुख खबरे

More like this
Related

मुंबई में छिपा उत्तर प्रदेश का फरार गैंगस्टर गिरफ्तार, यलो गेट पुलिस की बड़ी कार्रवाई।

मुंबई वार्ता संवाददाता मुंबई पुलिस की यलो गेट पुलिस...

फडणवीस को केंद्र भेजने की तैयारी? संजय राउत का बड़ा दावा, शिंदे गुट पर भी साधा निशाना।

मुंबई वार्ता संवाददाता शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद...