अस्पताल के कमरे, मेडिक्लेम के सपने और हमारा सामाजिक गणित।

Date:

भरतकुमार सोलंकी/लेखक/मुंबई वार्ता

अगर आपका कोई मित्र या सगा-संबंधी किसी बड़े नामी-गिरामी अस्पताल में भर्ती हो, तो बताइए…क्या आपके दिल में भी एक हल्की-सी इच्छा नहीं जगती?कि “अगर मेरे घर किसी को भर्ती होना पड़े” — तो बस यहीं हो, इसी आलीशान अस्पताल में।और फिर, सिर्फ भर्ती ही नहीं — ट्विन शेयरिंग या जनरल वार्ड में नहीं,बल्कि *सिंगल एसी प्राइवेट रूम, डीलक्स अथवा सुइट रूम* में,जहाँ डॉक्टर के आने से पहले नर्स आपके कमरे में मिनरल वाटर और मुस्कान लेकर प्रवेश करे।

अब सच कहिए — आप जब किसी को मिलने जाते हैं, तो लॉबी में खड़े होकर कौन-सी चर्चा सबसे ज़्यादा होती है?हाँ, वही… “आपका मेडिक्लेम कितना है?”और अगर कोई दोस्त बड़ी सहजता से कह दे — “मेरा तो एक करोड़ का कवरेज है” —तो क्या आपकी आँखों में क्षणभर के लिए “आह!” और दिल में “वाह!” नहीं आता?फिर तुरंत अपने दिमाग में हिसाब लगाने लगते हैं —*”अरे, मेरा तो सिर्फ दस-पाँच लाख का ही है… कहीं कम तो नहीं?”*मगर असली ट्विस्ट तब आता हैं, जब वही एक करोड़ का मेडिक्लेमएक सिंगल पॉलिसी नहीं निकलकरदो-तीन अलग-अलग कंपनियों के टुकड़ों में बँटा हो।

अब सोचिए…अगर इमरजेंसी में इलाज चल रहा हो, तो क्या बीमा कंपनी भी एटीएम की तरह तुरंत पैसे उगल देगी?या फिर क्लेम फॉर्म की यात्रा पहले पॉलिसी नंबर-1, फिर पॉलिसी नंबर-2, फिर पॉलिसी नंबर-3 तक जाएगी?इस बीच, अस्पताल का बिलर बोलेगा — “सर, पहले पेमेंट करिए… बाद में क्लेम हो जाएगा”।और आप — अपनी जेब में टटोलते हुए — सोचेंगे,“ये करोड़ का कवरेज असल में करोड़ का कवरेज हैं या करोड़ का कवरेज भ्रम?”

सच कहूँ तो, बड़े अस्पतालों की चकाचौंध में हम अक्सर भूल जाते हैंकि इलाज की *असली क्वालिटी डॉक्टर की नॉलेज से आती हैं, न कि कमरे के पर्दों और गद्दों की मोटाई से।*और मेडिक्लेम की असली अहमियत उसके प्रैक्टिकल पेआउट में हैं, न कि उसके पोस्टर पर छपे अंकों में।इसलिए अगली बार जब आप अस्पताल लॉबी में खड़े होकर चर्चा करे, तो ये भी सोचिए — *क्या हम इलाज के नाम पर रूम टैरिफ का सपना देख रहे हैं,**या वाकई स्वास्थ्य सुरक्षा की तैयारी कर रहे हैं?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

प्रमुख खबरे

More like this
Related

मीरा भायंदर के आम मरीजों के लिए वरदान बना मानस हॉस्पिटल।

मुंबई वार्ता संवाददाता बदलते परिवेश में जहां अस्पतालों पर...

जोया अख्तर-रीमा कागती की प्रोडक्शन कंपनी से 66 हार्ड डिस्क गायब, करोड़ों के डेटा लीक की आशंका।

मुंबई वार्ता संवाददाता मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में उस समय...

खजुराहो के होटल से NDPS के 12 मामलों में फरार आरोपी गिरफ्तार, मुंबई पुलिस की बड़ी कार्रवाई।

मुंबई वार्ता संवाददाता मध्य प्रदेश के खजुराहो में मुंबई...